
छिंदवाड़ा. मौसम की मार ने एक बार फिर किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। गुरुवार रात हवाओं के साथ हुई बारिश से छिंदवाड़ा सहित पांढुर्ना जिले के कई क्षेत्रों में गेहूं की फसल तबाह हो गई है। शुक्रवार सुबह किसान जब अपने खेत में पहुंचे तो दूर-दूर तक उन्हें बर्बादी दिखाई दी। फसलों को खेतों में बिछा देख उनके आंखों से आंसू निकल गए। कई किसानों ने कर्जा लेकर बोवनी की थी तो वहीं कई किसानों ने इस बार अपनी बेटी की शादी सहित अन्य खर्च के लिए उम्मीद लगाया था। फसल खराब होने से उनकी उम्मीदें भी धूमिल हो गई हैं। किसानों का कहना है कि 60 प्रतिशत फसल खराब हो गई है। आगामी समय में ऐसा ही मौसम रहा तो पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी। किसान अब शासन से मदद की आस लगाए बैठे हैं। छिंदवाड़ा विकासखंड के बोरिया निवासी बलवीर पटेल ने बताया कि लगभग 35 एकड़ खेत में गेहूं की फसल अक्टूबर-नवंबर माह में बोई गई थी। हजारों रुपए की लागत आई थी। हम भाईयों ने सोचा था इस बार बढिय़ा खेती होगी। लेकिन मौसम की मार ने सभी सोच धरे के धरे रह गए। उन्होंने बताया कि फसल लगभग आधी पक चुकी थी। एक माह में पूरी पक जाती, लेकिन अब फसल को बचाना मुश्किल है। जिले के अधिकतर क्षेत्रों में यही स्थिति है। मौसम में अचानक हुए इस बदलाव से किसान चिंतित हैं। उल्लेखनीय है कि गुरुवार शाम को जिले के कई क्षेत्रों में हवाओं के साथ बारिश हुई। वहीं कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि हुई। मौसम में हुए इस बदलाव की वजह से खेतों में खड़ी फसल लेट गई। पांढुर्ना, मोहखेड़, छिंदवाड़ा सहित अधिकतर क्षेत्रों में गेहूं एवं सब्जी की फसलों को नुकसान पहुंचा है।
दिन भर होती रही धूप-छांव
गुरुवार देर रात गरज-चमक एवं तेज हवाओं के साथ हुई बारिश के बाद शुक्रवार सुबह भी आसमान में काले बादल छाए रहे। हालांकि कुछ देर बाद मौसम खुल गया और दिन भर धूप-छांव होती रही।
आज गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना
मौसम विभाग ने 17 से 21 फरवरी तक घने से साफ बादल रहने एवं 17 फरवरी को बिजली एवं आंधी के साथ बारिश की संभावना जताई है। अधिकतम तापमान 29-32 डिग्री सेन्टीग्रेट एवं न्यूनतम तापमान 14-16 डिग्री सेन्टीग्रेट के मध्य रहने की संभावना है। अधिकतम सापेक्षित आद्र्रता 74-96 प्रतिशत एवं न्यूनतम सापेक्षित आद्र्रता 34-46 प्रतिशत रहने की संभावना है। आने वाले दिनों में हवा पूर्व, दक्षिण एवं पश्चिम दिशाओ में बहने एवं 7-12 किमी प्रति घंटे की गति से चलने की संभावना है।
किसानों को कीट-रोग से बचाव की सलाह
आगामी समय में मौसम को देखते हुए किसानों को फसलों के बचाव को लेकर एडवाइजरी जारी की गई है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम को देखते हुए फसलों को कीट-रोग से बचाव करने चाहिए।
गेंहू की फसल बालिया निकलने की अवस्था में है। जो किसान बीज उत्पादन करना चाहते है वे विजातीय पौधों को निकालकर खेत से अलग करें। गेहूं की बालियां निकलते समय फव्वारा विधि से सिंचाई न करें अन्यथा फूल गिर सकते हैं, दानों का मुंह काला पड़ जाता है व करनाल बंट तथा कंडुआ रोग लगने का डर रहता है। आवश्यकता से अधिक सिंचाई करने पर फसल गिर सकती है, दानों में दूधिया धब्बे दिखाई देते हैं और उपज घट जाती है ।