Rajasthan Missing Cases: घर के आंगन में बच्चों की चहलकदमी अचानक बंद हो जाए, तो माता-पिता के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। चित्तौड़गढ़ जिले में नाबालिगों का बालिग होने से पहले ही बहककर घर छोड़ जाना अब एक गंभीर सामाजिक चिंता बनता जा रहा है। कोई प्रेम प्रसंग के जाल में फंसकर घर छोड़ रहा है, तो कोई अपनों के ही तानों और घरेलू कलह से तंग आकर आत्मघाती कदम उठा रहा है।
Missing Minors Case: घर के आंगन में बच्चों की चहलकदमी अचानक बंद हो जाए, तो माता-पिता के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। चित्तौड़गढ़ जिले में नाबालिगों का बालिग होने से पहले ही बहककर घर छोड़ जाना अब एक गंभीर सामाजिक चिंता बनता जा रहा है। घर से लापता होने के बाद जब पुलिस इन नाबालिगों को दस्तयाब (बरामद) करती है, तो इनकी कहानियां झकझोर देने वाली होती हैं।
कोई प्रेम प्रसंग के जाल में फंसकर घर छोड़ रहा है, तो कोई अपनों के ही तानों और घरेलू कलह से तंग आकर आत्मघाती कदम उठा रहा है। हालांकि पुलिस गुमशुदा लोगों को दस्तयाब कर रही है लेकिन फिर भी यह सामाजिक चिंता का एक बड़ा कारण बन गया है।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 के शुरुआती 4 महीनों (जनवरी से अप्रेल) में ही चित्तौड़गढ़ जिले से 73 नाबालिग लापता हो चुके हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें 69 बालिकाएं हैं। लापता होने वाले अधिकांश किशोर-किशोरी 14 से 17 वर्ष आयु वर्ग के हैं।
यह तो महज वो आंकड़ा है जो पुलिस थानों तक पहुंचा है, बदनामी के डर और आपसी समझौतों के कारण कई मामले दर्ज ही नहीं हो पाते। राहत की बात यह है कि पुलिस मुस्तैदी दिखाते हुए इस अवधि में 70 नाबालिगों को दस्तयाब कर चुकी है।
यह स्थिति हाल में जारी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की साल 2024 की रिपोर्ट में सामने आई है। इसमें चित्तौड़गढ़ जिला गुमशुदगी मामलों में टॉप 10 जिलों में चौथे स्थान पर रहा। जिले में वर्ष 2024 में कुल 1344 लोग लापता हुए जिनमें 187 पुरूष और 1157 महिलाएं शामिल हैं।
जिले में नाबालिगों के लापता होने का ग्राफ पिछले दो वर्षों की तुलना में थोड़ा सुधरा है, लेकिन स्थिति अब भी चिंताजनक है।
| वर्ष | पूर्व गुमशुदा | चालू वर्ष गुमशुदा | कुल | दस्तियाब | शेष |
|---|---|---|---|---|---|
| 2024 | 257 | 57 | 314 | 289 | 25 |
| 2025 | 224 | 25 | 249 | 224 | 25 |
| 2026 (अप्रैल तक) | 73 | 25 | 98 | 70 | 28 |
गुमशुदा नाबालिगों को तलाशने के लिए पुलिस विशेष प्रयास कर रही है। ऐसा नहीं कि सभी नाबालिग प्रेम प्रसंग के कारण ही घर छोड़ रहे हों, इसके पीछे कई सामाजिक और पारिवारिक कारण होते हैं। आज के युवाओं में गुस्से और कड़े फैसलों की प्रवृत्ति बढ़ी है। पुलिस अपने स्तर पर लगातार सक्रिय है।
-मनीष त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक, चित्तौड़गढ़