
राजस्थान में लापता लोगों के आंकड़े चौंकाने वाले, टॉप-10 जिलों में उदयपुर सबसे ऊपर-फोटो एआइ
NCRB 2024 Report: राजस्थान में लापता होने वालों में हर चार में से 3 महिलाएं होती हैं। उदयपुर, भीलवाड़ा और पाली जिलों में स्थिति ज्यादा चिंताजनक है। उदयपुर में एक साल में 1879 लोग लापता हुए, जिसमें 1338 महिलाएं और युवतियां हैं। यह स्थिति हाल में जारी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की साल 2024 की रिपोर्ट में सामने आई है।
प्रदेश में साल 2024 के दौरान लापता लोगों के मामलों ने पुलिस और समाज दोनों की चिंता बढ़ा दी है। जिलेवार आंकड़ों में उदयपुर सबसे संवेदनशील जिला बनकर सामने आया है, जहां एक साल में 1,879 लोग लापता हुए। इनमें 1,338 महिलाएं और युवतियां शामिल हैं। एनसीआरबी आधारित जिला स्तरीय आंकड़ों के अनुसार चौंकाने वाली बात यह है कि महिलाओं और किशोरियों के गायब होने के मामले पुरुषों की तुलना में तीन गुना से ज्यादा हैं। प्रदेश में महिलाओं के लगातार बढ़ते लापता मामलों ने कानून-व्यवस्था के साथ सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उदयपुर में 2024 के दौरान कुल 1,879 लोग लापता दर्ज किए गए। इनमें 1,338 महिलाएं और युवतियां हैं। यह संख्या पूरे राजस्थान में सबसे ज्यादा है। जिले में 458 नाबालिग भी लापता हुए। आदिवासी बेल्ट, पलायन और सोशल मीडिया प्रभाव को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है।
उदयपुर में बच्चों और किशोरियों के मामलों ने भी पुलिस की चिंता बढ़ाई है। जिले में 18 वर्ष से कम आयु के 458 बच्चे और किशोर-किशोरियां लापता हुए। इनमें बड़ी संख्या किशोरियों की रही।
आंकड़ों से स्पष्ट है कि ग्रामीण व आदिवासी जिलों में महिलाओं के लापता होने की संख्या ज्यादा है। उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, राजसमंद और चित्तौड़गढ़ जिलों में यह ट्रेंड साफ दिखता है।
| क्रम | जिला | पुरुष | महिला | कुल |
|---|---|---|---|---|
| 1 | उदयपुर | 541 | 1338 | 1879 |
| 2 | भीलवाड़ा | 318 | 1319 | 1637 |
| 3 | पाली | 231 | 1167 | 1398 |
| 4 | चित्तौड़गढ़ | 187 | 1157 | 1344 |
| 5 | कोटा शहर | 388 | 923 | 1311 |
| 6 | अजमेर | 258 | 991 | 1249 |
| 7 | जयपुर पश्चिम | 429 | 763 | 1192 |
| 8 | हनुमानगढ़ | 295 | 892 | 1187 |
| 9 | गंगानगर | 271 | 847 | 1118 |
| 10 | राजसमंद | 161 | 943 | 1104 |
इनका कहना है…
केवल पुलिस कार्रवाई से समस्या का समाधान संभव नहीं है। परिवार, स्कूल, पंचायत, महिला एवं बाल विकास विभाग और साइबर मॉनिटरिंग एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा। किशोरियों की काउंसलिंग, स्कूल स्तर पर जागरूकता, साइबर सुरक्षा शिक्षा और संवेदनशील जिलों में विशेष निगरानी अभियान जरूरी है।
ध्रुव कुमार कविया, सदस्य, राज्य बाल आयोग
Published on:
16 May 2026 01:58 pm
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