
कोयम्बत्तूर.बेंगलूरु. सुरक्षा के मामले में स्वदेशी हल्के युद्धक विमान (एलसीए) तेजस LCA Tejas का रिकार्ड काफी अच्छा रहा है। पिछले 18 साल के दौरान तेजस के उड़ान में पहली बार कोई समस्या आई है। तेजस ने 4 जनवरी 2001 को पहली उड़ान भरी थी।
अधिकारियों के मुताबिक पिछले 18 साल के दौरान टायर फटने, सॉफ्टवेयर में समस्या अथवा विद्युत आपूर्ति संबंधी दिक्कतों को छोड़कर तेजस के उड़ान लाइन में कोई बड़ी समस्या नहीं आई थी। एक अधिकारी ने कहा कि मंगलवार को भी उड़ान भरने के बाद विमान ऊंचाई की ओर बढ़ रहा था तभी ड्रॉप टैंक गिरा। इस बात की जांच की जा रही है कि समस्या किस कारण उत्पन्न हुई।
तेजस 4600 लीटर से अधिक ईंधन लेकर उड़ान भर सकता है। इसके दोनों पखों में 700 - 700 लीटर के ईंधन टैंक होते हैं। इसके अलावा फ्यूसलिज (पिछले हिस्से) में 850 लीटर ईंधन भरा जा सकता है। साथ ही दोनों तरफ लगे बाहरी ड्रॉप टैंक की ईंधन क्षमता भी 1200 -1200 लीटर की होती है। इनमेें से ही एक टैंक मंगलवार को उड़ान के दौरान खेत में गिरा था।
तेजस क्वाड्रुप्लेक्स डिजिटल फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम से लैस है जिसके कारण ड्रॉप टैंक अथवा हथियारों के गिरने की स्थिति में भार असंतुलन जैसी स्थिति पैदा नहीं होती। विमान से अलग कर गिराए जा सकने वाले ड्रॉप टैंक दुश्मन के इलाके से अथवा विषम परिस्थिति में होने पर पायलट के त्वरित गति से सुरक्षित निकलने में मददगार होते हैं।
सुलूर वायुसैनिक अड्डा Coimbatore ( Tamil Nadu) तेजस का होम बेस भी है। वायुसेना में तेजस का पहला बेड़ा प्रारंभिक परिचालन प्रमाण पत्र (आईओसी) मानक वाले दो विमान के साथ बेंगलूरु में स्क्वाड्रन संख्या 45 फ्लाइंग ड्रैग्र्स के नाम से बना था। बाद में इसे सुलूर स्थानांतरित कर दिया गया। वायुसेना के पास अभी बेड़े में 14 तेजस विमान हैं और अगले महीने दो और विमान मिलने की संभावना है। इस साल के अंत तक 20 विमानों के इस स्क्वाड्रन के पूरा हो जाने की संभावना है जिसमें एकल सीट वाले 16 युद्धक विमान और दो सीट वाले ४ प्रशिक्षक विमान शामिल होंगे। वायुसेना पहले ही 40 तेजस विमानों के लिए आर्डर दे चुकी है।
विमान का उत्पादन करने वाली बेंगलूरु आधारित सरकारी कंपनी हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ( HAL ) के अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी समस्या होने की स्थिति में भी विमान में हालात से निपटने के लिए कई इन-फ्लाइट रिडंडेंसी सिस्टम हैं। एचएएल के एक अधिकारी के मुताबिक कंपनी की तकनीकी टीम को वायुसेना से इसे लेकर जो प्रारंभिक आकलन रिपोर्ट मिली है उसके आधार पर टीम इसके कारणों का पता लगाने की कोशिश करेगी। हालांकि, उक्त अधिकारी ने कहा कि युद्धक विमानों के उड़ान प्रोफाइल में ड्रॉप टैंक जेटीसनिंग (ड्रॉप टैंक को आपात स्थिति में गिराना) एक हिस्सा होता है जिसका उपयोग हालात के हिसाब से किया जाता है।