पशुपालन विभाग द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में सिर्फ भारतीय उन्नत नस्ल की गायों और जिले की मूल नस्ल केनकथा की गायों को शामिल किया गया है।
गोपालन को प्रोत्साहित करने और देसी नस्लों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत जिले में दुग्ध उत्पादन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है। प्रतियोगिता में चयनित पशुपालकों की गायों की मिल्क प्रक्रिया रविवार सुबह से आरंभ हो चुकी है।
बता दें कि पशुपालन विभाग द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में सिर्फ भारतीय उन्नत नस्ल की गायों और जिले की मूल नस्ल केनकथा की गायों को शामिल किया गया है। दोनों नस्लों के लिए अलग अलग श्रेणियों में प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। विभागीय अधिकारियों द्वारा बताया गया है कि प्रतिदिन समिति के सदस्य प्रशिक्षित कर्मियों की टीम के साथ सुबह, दोपहर और शाम तीनों समय चयनित गायों का दूध निकाल रहे हैं। पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ की जा रही है, ताकि दूध उत्पादन का सही आंकलन हो सके। तीनों समय के मिल्क के औसत के आधार पर सर्वाधिक दूध देने वाली गायों का चयन किया जाएगा।
बताया कि प्रतियोगिता में विजयी रहने वाली भारतीय नस्ल और केनकथा नस्ल की तीन-तीन गायों को प्रमाण पत्र के साथ आकर्षक पुरस्कार दिए जाएंगे। इस पहल से पशुपालकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। वे अपने पशुओं की देखभाल में और अधिक रुचि ले रहे हैं।
पशुपालन विभाग के उपसंचालक डॉ. संजय पांडे ने बताया कि यह प्रतियोगिता न सिर्फ पशुपालकों की मेहनत को मान्यता देती है, बल्कि देसी नस्लों के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण प्रयास है। प्रतियोगिता की अंतिम रिपोर्ट सोमवार को सामने आएगी, जिसके आधार पर विजेता गायों की घोषणा की जाएगी।
प्रतियोगिता के लिए जिलेभर से कुल 86 आवेदन प्राप्त हुए थे। छंटनी प्रक्रिया के बाद समिति ने दोनों श्रेणियों से 10-10 गायों का चयन किया है। अब इन 20 चयनित गायों के बीच दुग्ध उत्पादन प्रतियोगिता हो रही है।