
ED Raid Uttarakhand: पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि जिस मामले को लेकर कार्रवाई की गई है, वह करीब साढ़े 10 साल पुराना है। ऐसे में चुनाव के ठीक पहले इस मामले में जांच एजेंसी की सक्रियता कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि अगर मामले में कोई गंभीर अनियमितता या अपराध था तो इतने लंबे समय तक सरकार और संबंधित एजेंसियां निष्क्रिय क्यों रहीं।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि चुनाव नजदीक आते ही ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों की गतिविधियां बढ़ना अब नई बात नहीं रह गई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पहले कई साथी कहते थे कि चुनाव नवंबर में होगा। मैं कहता था कि अभी तो सीबीआई वाले नोटिस लेकर घर नहीं आए, लगता है चुनाव मार्च-अप्रैल में होगा। अब पूर्व ओएसडी के घर ईडी की कार्रवाई के बाद उन्हें यही प्रक्रिया आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।
रावत ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियां भाजपा की चुनावी रणनीति के हिसाब से काम कर रही हैं। उनके मुताबिक, चुनाव से पहले विपक्षी नेताओं और उनसे जुड़े लोगों पर कार्रवाई के जरिए माहौल बनाने की कोशिश की जाती है।
ईडी की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए हरीश रावत ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान रोजगार और सरकारी भर्तियों को लेकर उठाए गए कदमों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने मुख्यमंत्री पद संभाला था, तब राज्य में करीब 50 से 55 हजार सरकारी पद खाली थे। युवाओं को रोजगार के लिए परेशानी उठानी पड़ रही थी और लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं का भी नियमित आयोजन नहीं हो रहा था।
रावत ने दावा किया कि उनकी सरकार के करीब तीन साल के कार्यकाल में लोक सेवा आयोग की दो परीक्षाएं कराई गईं। तीसरी परीक्षा की प्रक्रिया भी सरकार बदलने से पहले पूरी तैयारी तक पहुंच चुकी थी।
उन्होंने कहा कि उस समय शिक्षा और स्वास्थ्य विभागों में भी बड़ी संख्या में पद खाली थे। स्कूलों में शिक्षकों की कमी थी, जबकि अस्पतालों में डॉक्टर और नर्सों के पद खाली पड़े थे। आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों में अनुदेशकों समेत दूसरे कर्मचारियों की कमी का असर कामकाज पर पड़ रहा था।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इन कमियों को दूर करने के लिए उनकी सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को संस्थागत बनाने की दिशा में कदम उठाए। हमने दो फैसले लिए पहला अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का गठन किया गया। इसके अलावा मेडिकल और शिक्षा क्षेत्र में भर्ती के लिए अलग-अलग भर्ती बोर्ड बनाने की दिशा में भी काम किया।
रावत ने कहा कि उस समय सरकार का मकसद खाली पदों को भरने के साथ युवाओं के लिए नियमित और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था तैयार करना था। उन्होंने मौजूदा राजनीतिक माहौल के बीच अपने कार्यकाल के इन फैसलों को भी याद दिलाया।