Political News : 20 से अधिक वरिष्ठ भाजपा नेताओं को सत्ता में भागीदारी का मौका जल्द ही मिल सकता है। सरकार इन नेताओं को दर्जाधारी मंत्री बनाने की तैयारी में है। बकायदा ऐसे नेताओं की लिस्ट भी तैयार हो चुकी है। अनुमान लगाया जा रहा है कि होली से पहले इन नेताओं का राजतिलक हो सकता है।
Political News : 20 से अधिक भाजपा नेता जल्द ही दायित्वधारी मंत्री बन सकते हैं। सत्ता में भागीदारी की उम्मीदें लगाए नेताओं का सपना जल्द ही साकार होने वाला है। मंत्रिपरिषद विभाग ने सभी विभागों में वर्तमान में दायित्वों वाले रिक्त पदों का ब्योरा एकत्र करना शुरू कर दिया है। मंत्रिपरिषद विभाग के उप सचिव आलोक कुमार सिंह ने इस संबंध में सभी प्रमुख सचिव और सचिवों को पत्र भेजते हुए रिक्त पदों का विवरण मांगा है। उन्होंने विभागवार भरे हुए और रिक्त दोनों श्रेणियों का ब्योरा मांगा है। इसके साथ ही दायित्व के पद के लिए तय शैक्षिक योग्यता, आयु सीमा की जानकारी भी मांगी है। मंत्रिपरिषद विभाग की इस कवायद से भाजपा में अंदरखाने खूब हलचल है। बता दें कि धामी कैबिनेट के विस्तार और दायित्व वितरण का इंतजार किया जा रहा है। कुछ समय पहले प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट दायित्व वितरण को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ चर्चा भी कर चुके हैं। होली तक 20 से अधिक वरिष्ठ भाजपा नेता दर्जाधारी मंत्री बनाए जा सकते हैं। इसे लेकर पार्टी में चर्चाएं चल रहीं हैं। इधर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के मुताबिक दायित्व वितरण को लेकर सरकार और संगठन की वार्ता हो चुकी है। पार्टी करीब 20 से ज्यादा वरिष्ठ नेताओं के नाम की सूची दे चुकी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही दायित्व वितरण हो जाएगा।
उत्तराखंड के विभिन्न आयोग, निगम, परिषदों में 200 से ज्यादा ऐसे पद हैं जहां सरकार जनप्रतिनिधियों और विशेषज्ञों को अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सलाहकार, सदस्य आदि पदों पर नियुक्त करती है। अब तक राज्य के प्रमुख आयोग, निगम और परिषदों में विभिन्न चरणों में 72 लोगों को दायित्व दिए जा चुके हैं। इनमें 62 लोग राज्य सरकार के राज्यमंत्री दर्जाधारी हैं। वहीं, 10 वरिष्ठ नेताओं को आयोगों का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनाया गया है।
उत्तराखंड में दायित्व वितरण की उम्मीद चुनावी वर्ष होने की वजह से भी ज्यादा है। तय समय पर चुनाव होने पर अगले साल जनवरी में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो जाएगी। लिहाजा भाजपा संगठन भी सरकार पर पार्टी नेताओं को दायित्व देने के लिए दबाव बनाए हुए है। संगठन का मानना है कि यदि दायित्व वितरण हो जाते हैं तो इसका लाभ चुनाव के दौरान भी मिलेगा।इसी को देखते हुए ये माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही दायित्वों का वितरण कर सकती है।