Court Decision : पॉक्सो कोर्ट ने युवती के आचरण को दूषित बताते हुए रेप के आरोपी को बरी कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि दोनों के बीच आपसी सहमति से संबंध बने थे। युवती ने शादी न होने पर कानून का दुरुपयोग करते हुए झूठा मुकदमा दर्ज कराया।
Court Decision : शादी का झांसा देकर युवती से दुष्कर्म के मामले में में कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है। ये मामला उत्तराखंड के देहरादून का है। यहां 20 सितंबर 2019 को एक युवती ने बसंत बिहार थाने में टिहरी निवासी सुभाष नाम के एक युवक के खिलाफ रेप का केस दर्ज कराया था। साथ ही युवक के परिजन फिचरू, सुनील और पूर्णा देवी के खिलाफ गाली-गलौज व धमकी देने का केस दर्ज कराया गया था। युवती ने तहरीर में बताया था कि सुभाष ने उससे दोस्ती बढ़ाई और शादी का झांसा देकर उससे दुराचार किया। युवती का आरोप था कि बाद में सुभाष शादी से मुकर गया था। इसी को लेकर युवती ने उसके खिलाफ केस दर्ज कराया था। तमाम साक्ष्यों का अवलोकन करते हुए पोक्सो कोर्ट ने पाया कि पीड़िता और आरोपी के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध थे।आरोपी ने शादी से इनकार किया तो पीड़िता ने इसे रेप का मामला बना दिया। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता बालिग और नौकरीपेशा युवती है। न कि जबरदस्ती। ऐसे में आरोपी बरी किए गए। मुख्य आरोपी सुभाष को दो महीने से अधिक जेल में रहना पड़ा।
13 साल की किशोरी का अपहरण कर दुष्कर्म करने के दोषी चार बच्चों के बाप को कोर्ट ने 20 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश पोक्सो अर्चना सागर की कोर्ट ने दोषी पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। विशेष लोक अभियोजक अल्पना थापा के मुताबिक पीड़िता की मां ने शहर कोतवाली में 24 फरवरी 2022 को केस दर्ज कराया। इसमें बताया कि 22 फरवरी 2022 को उनकी बेटी कूड़ा फेंकने गई थी। वहां से वह लापता हो गई। छानबीन में पता चला कि उनके घर के सामने मिस्त्री का काम करने वाला संजय मूल निवासी बिहार पीड़िता को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था। पुलिस ने 25 फरवरी को पीड़िता को बरामद कर आरोपी को गिरफ्तार किया था। तब पता लगा कि दोषी ने रायपुर क्षेत्र में एक कमरा किराए पर लेकर पीड़िता को तीन दिन तक बंधक रखा और उसके साथ दुष्कर्म किया।