
Paddy Procurement 2026: सबसे अहम बदलाव यह है कि टोकन रिजेक्ट होने के बाद किसान को नया टोकन जारी नहीं किया जाएगा। ऐसे किसान धान नहीं बेच पाएंगे। टोकन मिलने से लेकर धान उपार्जन केंद्र तक पहुंचाने में जरा सी चूक भी किसानों पर भारी पड़ सकती है। सरकार ने खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया है। वहीं, सीमांत, लघु और बड़े किसानों के लिए टोकन की अलग-अलग व्यवस्था लागू की गई है। धमतरी जिले में 15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होगी।
धमतरी जिले में इस बार खरीदी का दायरा बढ़ाते हुए पांच नई सहकारी समितियां और आठ नए उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं। पिछले साल जहां 74 समितियों के 100 केंद्रों पर खरीदी हुई थी, वहीं इस बार 96 समितियों के 108 केंद्रों पर किसान धान बेच सकेंगे। केंद्रों की संख्या बढऩे से किसानों को नजदीक में उपज बेचने की सुविधा मिलेगी और पुराने केंद्रों पर भीड़ का दबाव कम होने की उम्मीद है। हालांकि, नई व्यवस्था में तकनीकी नियमों की अनदेखी किसानों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।
केंद्रों की संख्या बढऩे से खरीदी व्यवस्था को राहत जरूर मिल सकती है, लेकिन इस बार किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती डिजिटल रिकॉर्ड की शुद्धता और टोकन के नियम होंगे। एग्रीस्टेक में दर्ज रकबे की त्रुटि, डिजिटल क्रॉप सर्वे में गलत प्रविष्टि या तय तारीख पर धान नहीं पहुंचा पाने की स्थिति में किसान की मुश्किल बढ़ सकती है। ऐसे में 15 नवंबर से शुरू होने वाली खरीदी में व्यवस्था की सफलता केवल केंद्रों की संख्या से नहीं, बल्कि किसानों को समय पर टोकन, सही रिकॉर्ड और निर्बाध खरीदी की सुविधा मिलने से तय होगी।
समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए किसानों की तैयारी के बीच इस बार खरीदी के नए नियमों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अब धान बेचने के लिए केवल पंजीयन कराना और टोकन हासिल करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि टोकन में दर्ज मात्रा और निर्धारित तारीख का भी पूरी तरह पालन करना होगा।
इस वर्ष धान का समर्थन मूल्य 3100 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान खरीदा जाएगा। किसानों को टोकन में दर्ज मात्रा के अनुरूप ही धान लाना होगा। खरीदी की सभी प्रविष्टियां डिजिटल डेटाबेस में दर्ज होंगी, जिससे रिकॉर्ड में पिछली तारीख से बदलाव और फर्जी खरीदी की गुंजाइश कम होगी। प्रशासन ने सभी 108 उपार्जन केंद्रों में तौल कांटे, कंप्यूटर, प्रिंटर, बिजली, पेयजल, शौचालय और किसानों के बैठने के लिए छायादार स्थान की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। सीसीटीवी कैमरों से निगरानी होगी।
जिले के संवेदनशील केंद्रों पर विशेष नजर रखी जाएगी। अवैध धान की आवक रोकने के लिए जांच नाके और निगरानी दल भी सक्रिय किए जाएंगे। बारदाने की उपलब्धता, धान की स्टैकिंग, कैप कवर, भंडारण और परिवहन पर भी नजर रहेगी।
इस बार खरीदी व्यवस्था में एग्रीस्टेक, डिजिटल क्रॉप सर्वे और बायोमेट्रिक सत्यापन को अनिवार्य प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है। यानी किसान के पंजीयन में दर्ज जमीन और वास्तविक खेती के रकबे का मिलान डिजिटल रिकॉर्ड से होगा। साथ ही खरीदी केंद्र पर अंगूठे के निशान या आंखों की पुतली के जरिए किसान की पहचान सुनिश्चित की जाएगी। इसके बाद ही धान बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसका उद्देश्य फर्जी पंजीयन, दूसरे के नाम पर धान बेचने और वास्तविक रकबे से अधिक धान खपाने की आशंका पर अंकुश लगाना है।
धमतरी जिले में करीब 1.58 लाख किसानों के लक्ष्य के विरुद्ध 1.45 लाख से अधिक किसानों का एग्रीस्टेक पंजीयन पूरा हो चुका है। पिछले वर्ष पंजीकृत और एग्रीस्टेक आईडी वाले किसानों को दोबारा पंजीयन कराने की जरूरत नहीं थी। वहीं, डिजिटल क्रॉप सर्वे के जरिए खेतों में वास्तविक बोनी और पंजीकृत रकबे का सत्यापन किया जाएगा। इससे रिकॉर्ड और वास्तविक खेती के बीच अंतर सामने आ सकेगा।
टोकन के लिए अब किसानों को समितियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। 10 नवंबर से तुंहर टोकन मोबाइल एप के जरिए घर बैठे ऑनलाइन टोकन लेने की सुविधा शुरू होगी। प्रत्येक समिति की प्रतिदिन की खरीदी क्षमता के 70 प्रतिशत टोकन मोबाइल एप से और 30 प्रतिशत टोकन समिति के माध्यम से जारी किए जाएंगे। दो एकड़ तक के किसानों को एक, दो से 10 एकड़ तक के किसानों को अधिकतम दो और 10 एकड़ से अधिक रकबे वाले किसानों को अधिकतम तीन टोकन दिए जाएंगे।