धमतरी

पथरीली जमीन पर हरियाली की मिसाल बना पम्पारनाला, 33 प्रशिक्षु IFS अधिकारियों ने किया अध्ययन, जानें कैसे मिली सफलता

Dhamtari News: वन प्रबंधन और जल संरक्षण मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमा रहा है। धमतरी जिले के पम्पारनाला की पथरीली जमीन पर जिस तरह से पानी रोककर हरियाली लाई गई है।
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Mar 10, 2026
पम्पारनाला पहुंचे 33 प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारी (फोटो सोर्स- पत्रिका)
पम्पारनाला पहुंचे 33 प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारी (फोटो सोर्स- पत्रिका)

CG News: धमतरी जिले का वन प्रबंधन और जल संरक्षण मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमा रहा है। धमतरी जिले के पम्पारनाला की पथरीली जमीन पर जिस तरह से पानी रोककर हरियाली लाई गई है। वह अब देश के भावी वन अधिकारियों के लिए केस स्टडी बन गया है। इसी मॉडल का अवलोकन करने सोमवार को इंदिरा गांधी वन अकादमी देहरादून के 2025-26 बैच के आईएफएस अधिकारियों का दल धमतरी पहुंचा।

भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के 133 प्रोबेशनर अधिकारी शामिल हुए। यहां 15 मार्च तक सॉइल एंड वाटर कंजर्वेशन मेजर्स विषय पर जमीनी प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। प्रधान मुख्य वन संरक्षक व्ही श्रीनिवास राव के निर्देशन में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने शिरकत की। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (मानव संसाधन) शालिनी रैना, रायपुर सीसीएफ मणिवासगन एस और दुर्ग सीसीएफ मर्सीबेला ने प्रशिक्षुओं को तकनीकी पहलुओं और वन प्रबंधन की बारीकियों से अवगत कराया।

धमतरी डीएफओ श्रीकृष्ण जाधव ने प्रशिक्षुओं को पम्पारनाला परियोजना की सफलता की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पूर्व में यहां अत्यधिक मृदा अपरदन (सॉयल एरोजन) और मानसून के बाद सूखे जैसी गंभीर समस्याएं थीं। इन्हें दूर करने के लिए स्थल के अनुरूप वैज्ञानिक उपचार किए गए।

8 समूहों में दी जाएगी जानकारी

प्रशिक्षु अधिकारियों को बेहतर समझ के लिए 8 समूहों में बांटा गया है। बलौदाबाजार डीएफओ गणवीर धम्मशील, राजनांदगांव डीएफओ आयुष जैन, कांकेर डीएफओ रौनक गोयल, दुर्ग डीएफओ दिपेश कपिल और बालोद डीएफओ अभिषेक अग्रवाल सहित अन्य अधिकारियों ने ग्रुप लीडर के रूप में फील्ड पर लाइव डेमो और तकनीकी प्रशिक्षण दिया।

यह प्रशिक्षण दल 11 और 12 मार्च को कुसुमपानी नाला, कांसानाला और लकलकी नाला का दौरा करेगा।14 मार्च को दुगली स्थित वन-धन विकास केन्द्र में वनों के दोहन, कूप मार्किंग और कटाई कार्य का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करेंगे। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन की टीमें भी सुरक्षा व आपातकालीन सेवाओं के लिए तैनात रहेंगे।

ऐसे हुआ प्रयास, ऐसे मिली सफलता

ब्रशवुड चेकडेम, लूज बोल्डर चेकडेम, गेबियन संरचनाएं और 30-40 मॉडल का निर्माण किया गया। इसका उद्देश्य पानी के बहाव को धीमा करना, मिट्टी के कटाव को रोकना और भू-जल स्तर को बढ़ाना था। इससे यह फायदा हुआ कि पम्पारनाला में अब बारहमासी जल भराव रहता है, जिससे न केवल सिंगपुर, कमईपुर और राउतमुड़ा के ग्रामीणों को सिंचाई सुविधा मिली है, बल्कि वन्यप्राणियों के लिए भी पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है।

Updated on:
10 Mar 2026 07:06 pm
Published on:
10 Mar 2026 07:06 pm