Owaisi Big Statement on Bhojshala Verdict: भोजशाला पर एमपी हाईकोर्ट इंदौर के फैसले से निराश हुए AIMIM चीफ असदउद्दीन ओवैसी, बाबरी मस्जिद को किया याद...
Owaisi Big Statement on Bhojshala Verdict: धार भोजशाला पर मध्य प्रदेश इंदौर हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक धार भोजशाला एक मंदिर है और इसके परिसर में हिंदुओं को ही पूजा करने का अधिकार है। कोर्ट ने ASI सर्वे और अयोध्या मामले की मिसाल देते हुए माना कि यह स्थल कभी मूल रूप से वाग्देवी मंदिर और संस्कृत शिक्षा का केंद्र था। इंदौर हाईकोर्ट के हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के पक्ष में दिए इस फैसले के बाद AIMIM चीफ असदउद्दीन ओवैसी का बयान सामने आया है। ओवैसी ने इसे बाबरी मस्जिद जैसा फैसला बताते हुए इस पर विरोध जताया है।
AIMIM चीफ असदउद्दीन ओवैसी ने इंदौर हाईकोर्ट के इस फैसले पर निराशा व्यक्त की है। वह अब मामले पर सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कह रहे हैं।
इंदौर हाईकोर्ट के भोजशाला को मंदिर घोषित करने के फैसले पर ओवैसी ने कड़ी आपत्ति जताई है। वहीं इस फैसले की तुलना बाबरी मस्जिद के फैसले से कर डाली। ओवैसी ने कहा कि हाईकोर्ट के इस आदेश में गंभीर समानताएं हैं।
ओवैसी ने हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीट कोर्ट जाने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस गलती को सुधारते हुए हाईकोर्ट के आदेश को पलट देगा।
बता दें कि इंदौर हाईकोर्ट में चल रहे भोजशाला विवाद पर आज शुक्रवार 15 मई 2026 को फैसला आ गया है। फैसले के बाद जहां मुस्लिम पक्ष में निराशा दिखी, वहीं हिंदू संगठन उत्साहित थे और फैसले का स्वागत कर रहे थे। इस बीच मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की बात कही है। इस बीच AIMIM चीफ असदउद्दीन का बयान भी चर्चा में है। उन्होंने इंदौर हाईकोर्ट के इस फैसले की तुलना बाबरी मस्जिद के फैसले से करते हुए इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने ASI की सौंपी रिपोर्ट को आधार मानते हुए साफ कहा कि यह परिसर मूल रूप से देवी सरस्वती का मंदिर है। अदालत ने यह भी माना कि 11वीं सदी के इस स्मारक में संस्कृत शिक्षण केंद्र और मां वाग्देवी मंदिर होने के संकेत मिले हैं। कोर्ट ने ASI के 21 साल पुराने आदेश को रद्द कर करते हुए मुसलमानों को यहां हर शुक्रवार को नमाज अदा करने की अनुमति दी थी। लेकिन आज कोर्ट ने फैसले में इसे मंदिर घोषित करते हुए यहां केवल हिंदुओं को पूजा करने का अधिकार दे दिया है।
इधर शहर काजी ने दिया तर्क- सैकड़ों साल से पढ़ी जा रही नमाज, पढ़ना जारी रखेंगे
शहर काजी ने ASI की सर्वे रिपोर्ट को 'बायस्ड' (पक्षपातपूर्ण) बताते हुए आरोप लगाया कि सर्वेक्षण के दौरान मिले कई साक्ष्यों की अनदेखी की गई है। वहीं सर्वे रिपोर्ट केवल एक पक्ष को फायदा पहुंचाने के लिए तैयार की गई थी।
शहर काजी ने यह तर्क भी दिया कि 2003 का आदेश नमाज को नियमित करने के लिए था न कि उसे शुरू करने के लिए। उन्होंने कहा यहां सैकड़ों सालों से नमाज अदा की जा रही है, ऐसे में वे अब भी नमाज पढ़ना जारी रखेंगे। यही नहीं उन्होंने सवाल भी उठाया कि जब शहर में धारा 144 या 163 लागू की गई थी, तो फिर हिंदू पक्ष ने आतिबाजी कर जश्न कैसे मना लिया। क्यों नारेबाजी की गई? उन्होंने पुलिस प्रशासन पर भी निशाना साधा कि वह भी एक समुदाय के लिए ही कानून लागू कर रहा है।
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