
भोजशाला मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला आज (Photo Source- Patrika)
Dhar Bhojshala :मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद विवाद को लेकर आज इंदौर हाई कोर्ट बड़ा फैसला सुना सकता है। इस संभावित फैसले को मद्देनजर रखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस अलर्ट मोड पर है। जिलेभर में धारा 163 लागू कर दी गई है और 5 जून तक पांच या उससे अधिक लोगों के सार्वजनिक रूप से इकट्ठे होने पर प्रतिबंध लगाया गया है। शुक्रवार सुबह से संवेदनशील इलाकों को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। आसपास के जिलों तक से अतिरिक्त सुरक्षा बल बुलाए गए हैं।
इसके अलावा प्रशासन की ओर से सोशल मीडिया पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। किसी भी प्रकार की अफवाह, भड़काऊ पोस्ट या कानून हाथ में लेने वालों पर सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी जारी की गई है। वहीं, खासतौर पर भोजशाला परिसर के आसपास सुरक्षा घेरा बढ़ाया गया है और पूरे शहर में पुलिस गश्त तेज कर दी गई है।
आपको बता दें कि, भोजशाला विवाद पिछले 4 साल से कानूनी, ऐतिहासिक और धार्मिक बहस का केंद्र बना हुआ है। साल 2022 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस से रंजना अग्निहोत्री और अन्य याचिकाकर्ताओं ने इंदौर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने और हिंदू समाज को पूर्ण पूजा अधिकार देने की मांग की थी।
इसपर हाई कोर्ट के निर्देश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने साल 2024 में 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वे कराया। सर्वे रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई और 6 अप्रैल 2026 से नियमित सुनवाई शुरू हुई जो 12 मई तक चली। पांच याचिकाओं, एक अपील और तीन इंटरवेंशन आवेदनों पर सुनवाई के बाद डबल बेंच ने आज तक के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब इंदौर हाई कोर्ट के इस फैसले पर देश-प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।
हिंदू पक्ष से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, अधिवक्ता विनय जोशी और मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने कोर्ट में भोजशाला को मां वाग्देवी का प्राचीन मंदिर बताया है। उन्होंने ASI सर्वे रिपोर्ट, ऐतिहासिक दस्तावेज, शिलालेख और स्थापत्य संरचनाओं का हवाला देते हुए कहा कि, परिसर में मंदिर स्वरूप के स्पष्ट प्रमाण हैं। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि, ब्रिटिशकालीन गजेटियर और इतिहासकारों के अभिलेखों में भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर और विद्या केंद्र बताया गया है। परिसर में मिले संस्कृत और नागरी लिपि के शिलालेखों को भी हिंदू पक्ष ने महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया है।
वहीं, दूसरी तरफ मुस्लिम पक्ष की तरफ से सीनियर एडवोकेट शोभा मेनन, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता सलमान खुर्शीद और अधिवक्ता तौसिफ वारसी ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए ASI सर्वे रिपोर्ट और ऐतिहासिक व्याख्याओं पर सवाल उठाए। सलमान खुर्शीद ने कहा- सर्वे के दौरान उपलब्ध कराई गई तस्वीरें और वीडियोग्राफी स्पष्ट नहीं थीं। उन्होंने ये भी कहा कि, अयोध्या मामले की तरह यहां किसी स्थापित मूर्ति की उपस्थिति नहीं है। मुस्लिम पक्ष ने ये तर्क भी दिया कि, परिसर लंबे समय से कमाल मौला मस्जिद के रूप में उपयोग में रहा है। मौजूदा व्यवस्था सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए की गई थी।
मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में ये तर्क भी दिया कि, किसी विवादित स्थल का धार्मिक स्वरूप तय करने का अधिकार सिविल कोर्ट को है, जबकि ये याचिका हाई कोर्ट में अनुच्छेद 226 के तहत दायर की गई है। दूसरी तरफ हिंदू पक्ष ने संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत पूजा-अर्चना के अधिकार का हवाला देते हुए परिसर में नियमित पूजा की अनुमति और नमाज पर रोक लगाने की मांग की।
संभावित फैसले को देखते हुए धार कलेक्टर राजीव रंजन मीना और एसपी सचिन शर्मा लगातार स्थिति की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। दोनों अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और कोर्ट के फैसले का सम्मान करने की अपील की है। पुलिस प्रशासन ने साफ कहा है कि, सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों और शांति व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च भी किया जा रहा है।
एक तरफ शुक्रवार को ये फैसला आ रहा है तो वहीं, SAI के आदेशनुसार, जुमे की नमाज भी होना है। ऐसे में दोपहर 1.30 से 3 बजे के बीच मुस्लिम समुदाय द्वारा कमाल मौला मस्जिद में जुमे की नमाज भी अदा की जाएगी।
वहीं, दूसरी तरफ हिंदू संगटन ने भी आज सुबह से पूजन चालु कर दिया है। कई हिंदु संघटन और भोज उत्सव समिति शहर की महिलाओं को लेकर भोजशाला के करीब स्थित ज्योति मंदिर में इकठा हुए हैं। यहां हनुमान चलीसा का पाठ किया जा रहा है। ऐसे में प्रशासन के सामने शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
Updated on:
15 May 2026 11:41 am
Published on:
15 May 2026 10:53 am
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