Belpatra Ki Kahani: भगवान शिव बहुत ही दयालु हैं, वे अनजाने में किए अच्छे काम से प्रसन्न होकर व्यक्ति का उद्धार कर देते हैं, डाकू और बेलपत्र से जुड़ी ऐसी ही शिवजी की कहानी है, जिसे सावन में जरूर पढ़ना चाहिए।
भगवान शिव के पूजा में बिल्वपत्र (बेल पत्र) का बड़ा महत्व है। हर श्रद्धालु भगवान की पूजा में बेलपत्र, धतुरा आदि जरूर चढ़ाता है। शिवज को बेलपत्र चढ़ाने के धार्मिक महत्व को बताने वाली एक कथा बहुत प्रचलित है, जिसमें बेलपत्र की महत्ता समझाई गई है। आइये जानते हैं डाकू और बेलपत्र से जुड़ी शिव कथा
इस कथा के अनुसार, भील नाम का एक डाकू था। यह डाकू अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए लोगों को लूटता था। एक बार सावन के महीना में भील राहगीरों को लूटने के उद्देश्य से जंगल में गया। इसके लिए वह एक वृक्ष पर चढ़कर बैठ गया। लेकिन जिस पेड़ पर वह डाकू चढ़कर छिपा था, वह बेल यानी बिल्व का पेड़ था। इधर, देखते ही देखते पूरा एक दिन और पूरी रात बीत जाने पर भी उसे कोई शिकार नहीं मिला।
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रात-दिन बीत जाने के बाद भी उसे कोई शिकार नहीं मिला, इस कारण भील परेशान हो गया और बेल के पत्ते तोड़कर नीचे फेंकने लगा। संयोग से उसी पेड़ के नीचे एक शिवलिंग स्थापित था। भील जो पत्ते तोड़कर नीचे फेंक रहा था, वे शिवलिंग पर गिर रहे थे, और इस बात से भील पूरी तरह से अनजान था।
भील द्वारा लगातार फेंके जा रहे बेल के पत्ते शिवलिंग पर गिरने से भगवान शिव प्रसन्न हुए और अचानक डाकू के सामने प्रकट हो गए। भगवान शिव ने भील डाकू से वरदान मांगने के लिए कहा, और भील का उद्धार किया।
बस उसी दिन से भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाने का महत्व और अधिक बढ़ गया। और यह मान्यता प्रचलित हुई कि बेलपत्र चढ़ाने से भगवान शिव अति प्रसन्न होते हैं और उनकी पूजा में भक्तगण अनिवार्य रूप से बेलपत्र चढ़ाने लगे।
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