धर्म-कर्म

इस व्रत में चंद्र देव लेंगे कड़ा इम्तिहान, आधी रात तक करना होगा निर्जला उपवास

Chandroday on Ahoi Astami: कई व्रत में चंद्र दर्शन का महत्व होता है, संतान के सुख समृद्धि के लिए रखे जाने वाले व्रत में महिलाएं चंद्रोदय के बाद ही व्रत पूर्ण करती हैं और तब तक निराजल व्रत रखती हैं। लेकिन कार्तिक महीने में पड़ने वाले इस व्रत में इस साल चंद्र देव कड़ा इम्तिहान लेने वाले हैं और इस दिन आधी रात को चंद्रोदय होगा। आइये जानते हैं इस व्रत के बारे में ..

2 min read
Oct 06, 2024
Chandroday on Ahoi Astami vrat: अहोई अष्टमी पर चंद्रोदय

Chandroday on Ahoi Astami: कार्तिक कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि बेहद खास होती हैं। इस दिन उत्तर भारत में अधिकांश जगहों पर अहोई अष्टमी व्रत रखा जाता है। यह व्रत महिलाएं संतान के सुख और समृद्धि के लिए रखती हैं। यह कठिन उपवास माना जाता है, क्योंकि माताएं अपने पुत्रों की कुशलता के लिए उषाकाल (भोर) से लेकर गोधूलि बेला (सायंकाल) तक उपवास करती हैं।


सायंकाल के समय आकाश में तारों का दर्शन करने के बाद व्रत संपन्न करती हैं। हालांकि कुछ महिलाएं चंद्रमा के दर्शन करने के बाद व्रत पूर्ण करती हैं। लेकिन इसका अनुसरण करना कठिन होता है, क्योंकि अहोई अष्टमी की रात्रि में चंद्रोदय देरी से होता है। इस दिन गोवर्धन राधा कुंड में स्नान का बड़ा महत्व होता है।

ये भी पढ़ें

Chandra Ghanta Ki Aarti: आरती के बिना अधूरी है माता चंद्रघंटा की पूजा, पढ़ें-पूरी आरती जय मां चंद्रघंटा सुख धाम

दीपावली के 8 दिन पहले पड़ता है अहोई अष्टमी

अहोई अष्टमी व्रत का दिन करवा चौथ के चार दिन बाद और दिवाली पूजा से आठ दिन पहले पड़ता है। करवा चौथ के समान ही अहोई अष्टमी भी उत्तर भारत में अधिक लोकप्रिय है। अहोई अष्टमी के दिन को अहोई आठें नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह व्रत अष्टमी तिथि के समय किया जाता है, जो माह का आठवां दिन होता है।


करवा चौथ के समान अहोई अष्टमी का दिन भी कठोर उपवास का दिन होता है और अनेक स्त्रियां पूरे दिन जल तक ग्रहण नहीं करती हैं। आकाश में तारों का दर्शन करने के बाद ही उपवास का पारण किया जाता है। जबकि कुछ महिलाएं चंद्र दर्शन के बाद व्रत तोड़ती हैं। इस दिन गोवर्धन राधाकुंड में दर्शन का भी महत्व है।

ये भी पढ़ेंः

कब है अहोई अष्टमी

कार्तिक कृष्ण अष्टमी तिथि प्रारंभः 24 अक्टूबर 2024 को सुबह 01:18 बजे
कार्तिक कृष्ण अष्टमी तिथि समाप्तः 25 अक्टूबर 2024 को सुबह 01:58 बजे
अहोई अष्टमी व्रतः गुरुवार, 24 अक्टूबर 2024


अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्तः शाम 05:42 बजे से शाम 06:59 बजे तक
अवधिः 01 घंटा 17 मिनट्स
गोवर्धन राधा कुण्ड स्नानः बृहस्पतिवार, 24 अक्टूबर 2024 को
तारों को देखने का समयः शाम 06:06 बजे
अहोई अष्टमी के दिन चंद्रोदय का समयः सुबह 11:55 बजे तक

ये भी पढ़ें

Kushmanda Mata Ki Aarti: जीवन के अंधकार का नाश करती है माता कूष्मांडा की आरती, भक्त को मिलता है धन और अच्छा स्वास्थ्य

Also Read
View All

अगली खबर