
Padmini Ekadashi 2026: इस व्रत से जन्मा था रावण को बंदी बनाने वाला वीर (फोटो सोर्स: AI@Gemini)
Padmini Ekadashi 2026: क्या सिर्फ एक व्रत से इतना शक्तिशाली पुत्र मिल सकता है, जिसने लंकापति रावण तक को बंदी बना लिया था? पुराणों में पद्मिनी एकादशी से जुड़ी ऐसी ही अद्भुत कथा मिलती है। माना जाता है कि अधिकमास (Adhik Maas 2026) में आने वाली इस दुर्लभ एकादशी (Padmini Ekadashi) का व्रत करने से राजा कृतवीर्य को कार्तवीर्य अर्जुन जैसे पराक्रमी पुत्र की प्राप्ति हुई थी। यही वजह है कि तीन साल में एक बार आने वाली यह एकादशी बेहद पुण्यदायी मानी जाती है।
सरल शब्दों में समझें तो हिंदू पंचांग (कैलेंडर) सूर्य और चंद्रमा की चाल पर आधारित होता है। दोनों कैलेंडरों के बीच के अंतर को पाटने के लिए हर तीन साल में एक अतिरिक्त महीना जुड़ जाता है। इसी अतिरिक्त महीने को 'अधिकमास' या 'मलमास' कहा जाता है।
शास्त्रों के अनुसार, जब इस अतिरिक्त महीने की उत्पत्ति हुई, तो इसका कोई स्वामी (देवता) नहीं था। इस वजह से इसे अपवित्र या मलमास मानकर लोग इसमें कोई भी शुभ कार्य करने से कतराने लगे। इस महीने को समाज में उपेक्षित देखकर खुद भगवान विष्णु भावुक हो उठे।
उन्होंने इस असहाय महीने को अपनी शरण दी और अपना ही एक नाम पुरुषोत्तम इसे सौंप दिया। तब से यह महीना सबसे पवित्र और फलदायी माना जाने लगा। इस दौरान किए गए जप, तप और दान का पुण्य कई गुना बढ़कर मिलता है।
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल अधिकमास की शुरुआत 26 मई 2026 से हो रही है। इसी के साथ पद्मिनी एकादशी की तिथि और व्रत का शुभ समय कुछ इस प्रकार रहेगा:
एकादशी तिथि का प्रारंभ: 26 मई 2026, सुबह 05:11 बजे से।
एकादशी तिथि की समाप्ति: 27 मई 2026, सुबह 06:22 बजे तक।
व्रत की तारीख: उदयातिथि के नियम के अनुसार, पद्मिनी एकादशी का व्रत बुधवार, 27 मई 2026 को रखा जाएगा।
व्रत पारण (खोलने) का समय: अगले दिन यानी 28 मई 2026 को सुबह 05:45 बजे से 07:57 बजे के बीच।
पद्मिनी एकादशी के महत्व को समझने के लिए त्रेतायुग की एक बेहद दिलचस्प कहानी प्रसिद्ध है। राजा कृतवीर्य की कई रानियां थीं, लेकिन सालों बाद भी उनके घर कोई संतान नहीं हुई। संतान सुख की चाह में राजा अपनी रानियों के साथ राजपाठ छोड़कर घने जंगलों में घोर तपस्या करने चले गए।
कठिन तपस्या के बाद भी जब कोई रास्ता नहीं सूझा, तब रानियों ने माता अनसूया से मार्गदर्शन मांगा। माता अनसूया के कहने पर मुख्य रानी ने अधिकमास के शुक्ल पक्ष में आने वाली 'पद्मिनी एकादशी' का कठोर व्रत पूरी निष्ठा से किया।
रानी के इस समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए। वरदान के स्वरूप राजा-रानी को एक ऐसा पुत्र रत्न मिला, जिसका पराक्रम तीनों लोकों में गूंज उठा। इस बालक का नाम था कार्तवीर्य अर्जुन (जिन्हें सहस्त्रबाहु भी कहा जाता है)।
यह वही प्रतापी राजा थे जिन्होंने अपने अदम्य साहस से लंकापति रावण तक को बंदी बना लिया था। बाद में, स्वयं भगवान विष्णु के अंश अवतार भगवान परशुराम के हाथों उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई।
यदि आप भी इस महासंयोग का लाभ उठाना चाहते हैं, तो इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
आध्यात्मिक लाभ के अलावा, तीन साल में एक बार आने वाले इस महीने में उपवास रखने का एक बड़ा वैज्ञानिक कारण भी है। मौसम के बदलते मिजाज के बीच व्रत रखने से हमारा पाचन तंत्र सुधरता है और उपवास से पाचन तंत्र को आराम मिलता है और खानपान में संयम आने से शरीर हल्का महसूस कर सकता है।
चूंकि यह पुरुषोत्तम मास है, इसलिए इस पूरे महीने में शादी-ब्याह, मुंडन या गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। लेकिन इस दौरान तीर्थ यात्रा करना, श्रीमद्भागवत कथा सुनना, और भूखों को भोजन कराना महापुण्य का काम माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पद्मिनी एकादशी का व्रत सुख-शांति और समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है।
अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।
Published on:
18 May 2026 12:10 pm
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