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Garuda Purana: मरने के बाद आत्मा सबसे पहले क्या देखती है? जानें मृत्यु का रहस्यमयी सच

Garuda Purana Death Secrets: मृत्यु एक ऐसा सत्य है, जिससे कोई भी इंसान बच नहीं सकता। लेकिन इंसान के मन में हमेशा यह सवाल उठता है कि आखिर मृत्यु के बाद आत्मा के साथ क्या होता है? हिंदू धर्म के पवित्र ग्रंथ गरुड़ पुराण में मृत्यु और उसके बाद की यात्रा का बेहद रहस्यमयी वर्णन मिलता है।

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भारत

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MEGHA ROY

May 17, 2026

Garuda Purana

After Death Secrets Garuda Purana| Chatgpt

Garuda Purana:गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु केवल शरीर का अंत नहीं, बल्कि आत्मा की एक नई यात्रा की शुरुआत मानी जाती है। कहा जाता है कि जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तब आत्मा कुछ समय तक अपने ही घर और परिजनों के आसपास मौजूद रहती है। वह अपने मृत शरीर को देखती है और परिवार वालों के रोने-बिलखने को महसूस करती है, लेकिन चाहकर भी उनसे संवाद नहीं कर पाती। गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद आत्मा की स्थिति और यमलोक यात्रा का बेहद रहस्यमयी वर्णन मिलता है। यही कारण है कि मृत्यु और आत्मा से जुड़े ये रहस्य आज भी लोगों को हैरान कर देते हैं।

मृत्यु के क्षण में क्या होता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार, जब किसी व्यक्ति के प्राण निकलते हैं, तब उसकी आत्मा शरीर से अलग हो जाती है। मान्यता के मुताबिक, कहा जाता है कि आत्मा अंगूठे के आकार की सूक्ष्म ऊर्जा के रूप में बाहर निकलती है। उसी समय यमदूत वहां पहुंचते हैं, जो आत्मा को अपने साथ ले जाने के लिए आते हैं।

पुण्य कर्म करने वाले लोगों को यमदूत शांत, तेजस्वी और दिव्य स्वरूप में दिखाई देते हैं। वहीं, जिन्होंने जीवन में पाप और अन्याय किए होते हैं, उन्हें यही यमदूत अत्यंत भयावह रूप में नजर आते हैं। यह दृश्य आत्मा को उसके कर्मों का पहला संकेत देता है।

आत्मा को सबसे पहले क्या दिखता है?

गरुड़ पुराण में उल्लेख मिलता है कि मृत्यु के तुरंत बाद आत्मा को अपने पूरे जीवन के कर्म दिखाई देते हैं। उसने किसके साथ कैसा व्यवहार किया, कौन-से अच्छे या बुरे काम किए यह सब किसी चलचित्र की तरह उसके सामने आने लगता है।
यही वह क्षण होता है जब आत्मा को अपने कर्मों की सच्चाई का एहसास होता है। माना जाता है कि उस समय न धन साथ जाता है और न ही पद या प्रतिष्ठा, केवल कर्म ही आत्मा के साथ रहते हैं।

13 दिनों तक घर के आसपास रहती है आत्मा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा कुछ समय तक अपने परिवार और घर के आसपास ही रहती है। इसी कारण हिंदू धर्म में 13 दिनों तक कई धार्मिक क्रियाएं और तर्पण किए जाते हैं।

कहा जाता है कि परिजनों द्वारा किए गए पिंडदान और श्राद्ध से आत्मा को सूक्ष्म शरीर प्राप्त होता है, जिससे उसकी आगे की यात्रा आसान बनती है। इस दौरान आत्मा अपने प्रियजनों को देख सकती है, लेकिन उनसे संवाद नहीं कर पाती।

यमलोक की कठिन यात्रा

तेरहवें दिन के बाद आत्मा यमलोक की ओर प्रस्थान करती है। गरुड़ पुराण के अनुसार यह यात्रा आसान नहीं होती। आत्मा को अपने कर्मों के आधार पर न्याय मिलता है। अच्छे कर्म करने वालों को सुखद लोक प्राप्त होते हैं, जबकि बुरे कर्म करने वालों को कठिन यातनाओं का सामना करना पड़ता है।

गरुड़ पुराण का यह वर्णन केवल भय पैदा करने के लिए नहीं, बल्कि इंसान को अच्छे कर्म करने की प्रेरणा देने के लिए माना जाता है।