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Garuda Purana: 13 दिन तक गरुड़ पुराण सुनने से जीवित और मृतक दोनों का होता है उद्धार, जानें मान्यता

Garuda Purana: हिंदू धर्म में गरुड़ पुराण का एक खास महत्व है। इसे 13 दिनों तक सुनने की परंपरा है। माना जाता है कि इसे सुनने से कई पुण्य प्राप्त होते हैं और जीवन के कई रहस्यों को जानने का अवसर मिलता है।

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भारत

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MEGHA ROY

Mar 26, 2026

गरुड़ पुराण का 13 दिन श्रवण क्यों है खास?|फोटो सोर्स- Chatgpt

Garuda Purana: गरुड़ पुराण हिंदू धर्म के प्रमुख महापुराणों में से एक है, जिसमें Lord Vishnu ने भक्ति, कर्म, आत्मा और पुनर्जन्म के गूढ़ रहस्यों को विस्तार से बताया है।मान्यता है कि किसी परिजन के निधन के बाद 13 दिनों तक गरुड़ पुराण का पाठ करने से आत्मा को सद्गति प्राप्त होती है।कहा जाता है कि इस दौरान मृतक की आत्मा अपने घर में ही रहती है और इस ज्ञान को सुनती है।साथ ही, परिवार के जीवित सदस्य भी इस पाठ के माध्यम से जीवन, मृत्यु और पाप-पुण्य का ज्ञान प्राप्त करते हैं.

क्या मृतक की आत्मा गरुड़ पुराण सुनती है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा तुरंत शरीर को छोड़कर दूर नहीं जाती, बल्कि लगभग 13 दिनों तक अपने घर और परिजनों के आसपास ही रहती है। इस अवधि में गरुड़ पुराण का पाठ इसलिए किया जाता है ताकि आत्मा को जीवन, मृत्यु और उसके बाद की यात्रा का ज्ञान मिल सके।ऐसा माना जाता है कि जब आत्मा इस पवित्र ग्रंथ को “सुनती” है, तो उसे सही मार्ग मिलता है और वह भ्रमित होकर प्रेत योनि में भटकने से बचती है। इससे उसे सद्गति यानी अच्छे लोकों की प्राप्ति होती है।

गरुड़ पुराण का पाठ क्यों कराया जाता है?

गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद की अवस्थाओं स्वर्ग, नरक, पाप और पुण्य के फल का विस्तार से वर्णन मिलता है। इसका पाठ केवल मृतक के लिए ही नहीं, बल्कि जीवित लोगों के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।परिवार के सदस्य जब इसे सुनते हैं, तो उन्हें अपने कर्मों का महत्व समझ आता है। यह उन्हें सिखाता है कि जीवन में अच्छे कर्म, दान, पूजा, और सदाचार का पालन क्यों जरूरी है।

परिजनों के लिए आध्यात्मिक सीख

शोक की घड़ी में यह पाठ एक तरह का मानसिक सहारा भी देता है। दुख के बीच बैठकर जब सभी एक साथ इसे सुनते हैं, तो उन्हें जीवन के गहरे सत्य समझ में आते हैं।गरुड़ पुराण यह बताता है कि जीवन क्षणभंगुर है, लेकिन कर्मों का फल स्थायी है। इसलिए व्यक्ति को अपने जीवन में धर्म, भक्ति और सदाचार अपनाना चाहिए ताकि अंत समय में उसे भी उत्तम लोक की प्राप्ति हो सके।