12 मई 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पिंडदान और श्राद्ध न करने पर आत्मा को क्या कष्ट मिलता है? जानिए Garuda Purana में क्या कहा गया है

Garuda Purana Death Secrets: हिंदू धर्म में पिंडदान और श्राद्ध को केवल परंपरा नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति कर्तव्य माना गया है। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि यदि किसी व्यक्ति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान न किया जाए, तो उसकी आत्मा को कई प्रकार के कष्टों का सामना करना पड़ता है।

2 min read
Google source verification

भारत

image

MEGHA ROY

May 12, 2026

Pinddaan benefits for soul

Garuda Purana after death beliefs|Chatgpt

Garuda Purana Death Secrets: हिंदू धर्म में पिंडदान और श्राद्ध को पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन कर्मों के बिना आत्मा को परलोक में कई प्रकार के कष्टों का सामना करना पड़ सकता है। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि श्राद्ध और तर्पण न मिलने पर आत्मा अतृप्त रह जाती है और उसे भटकना पड़ता है। इतना ही नहीं, इसका प्रभाव परिवार के सुख-समृद्धि और वंश वृद्धि पर भी पड़ सकता है।

आत्मा को भूख और प्यास की पीड़ा

गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा सूक्ष्म रूप में रहती है। इस अवस्था में उसे तर्पण और पिंडदान से ही संतुष्टि मिलती है। यदि परिवारजन ये कर्म नहीं करते, तो आत्मा को निरंतर भूख और प्यास की वेदना सहनी पड़ती है। कहा जाता है कि ऐसी आत्माएं तृप्ति न मिलने के कारण बेचैन रहती हैं।

प्रेत योनि में भटकने की मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पिंडदान न मिलने पर आत्मा को आगे की यात्रा में बाधा आती है। उसे मोक्ष प्राप्त नहीं होता और वह प्रेत योनि में भटकती रहती है। ऐसी आत्मा अपने अधूरे कर्मों और इच्छाओं के कारण पृथ्वी लोक के आसपास ही विचरण करती है।

यमलोक की यात्रा में कठिनाई

गरुड़ पुराण में वर्णन मिलता है कि मृत्यु के बाद आत्मा को यमलोक तक लंबी यात्रा करनी पड़ती है। श्राद्ध और पिंडदान से आत्मा को इस मार्ग में शक्ति और सहारा मिलता है। लेकिन जब ये कर्म नहीं किए जाते, तब आत्मा कमजोर हो जाती है और उसे अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। धार्मिक ग्रंथों में इसे अत्यंत कष्टदायक स्थिति बताया गया है।

परिवार के बीच रहकर भी असहाय महसूस करती है आत्मा

ऐसी मान्यता है कि जिन आत्माओं को शांति नहीं मिलती, वे अपने परिवार के आसपास ही रहती हैं। वे अपने प्रियजनों को देख तो सकती हैं, लेकिन उनसे संवाद नहीं कर पातीं। यह स्थिति आत्मा के लिए बेहद दुखद मानी जाती है।

पितृ दोष से परिवार पर पड़ सकता है प्रभाव

धार्मिक मान्यताओं में कहा गया है कि पूर्वजों की आत्मा असंतुष्ट होने पर परिवार को पितृ दोष का सामना करना पड़ सकता है। इसके कारण घर में अशांति, आर्थिक परेशानी, विवाह में बाधा और संतान सुख में कठिनाइयां आने लगती हैं। इसलिए सनातन परंपरा में श्राद्ध और पिंडदान को श्रद्धा और सम्मान के साथ करने की सलाह दी जाती है।