
Jyeshtha Adhik Maas 2026 : ज्येष्ठ और अधिक मास में 4 एकादशी का संयोग, भगवान विष्णु की कृपा पाने का दुर्लभ अवसर (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)
Jyeshtha Adhik Maas 2026 : जयपुर. ज्येष्ठ मास और ज्येष्ठ अधिक मास में इस बार चार एकादशी व्रत (अपरा, पद्मिनी, परमा, निर्जला) का संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार भगवान विष्णु को समर्पित इन चार एकादशियों का व्रत करने से व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिलेगी साथ ही पुण्य फल की भी प्राप्ति होगी। इन एकादशी पर गोविंद देवजी मंदिर सहित शहर के प्रमुख मंदिरों में सुबह से भजन कीर्तन और विष्णु सहस्त्रनाम के पाठ के साथ ही अन्य धार्मिक आयोजन होंगे। श्रद्धालु तुलसी, फल और पंचामृत से भगवान विष्णु का अभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।
ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी। इसे अचला एकादशी भी कहा जाता है। धर्मग्रंथों के अनुसार इस दिन व्रत करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य की प्राप्ति।
| विवरण | तिथि / समय |
|---|---|
| एकादशी का नाम | अपरा एकादशी |
| पक्ष | ज्येष्ठ मास, कृष्ण पक्ष |
| एकादशी तिथि प्रारंभ | 12 मई, दोपहर 2:52 बजे |
| एकादशी तिथि समाप्त | 13 मई, दोपहर 1:29 बजे |
| व्रत रखने की तिथि | 13 मई (बुधवार) |
| व्रत पारण तिथि | 14 मई |
| पारण शुभ मुहूर्त प्रारंभ | सुबह 5:31 बजे |
| पारण शुभ मुहूर्त समाप्त | सुबह 8:14 बजे |
| विशेष मान्यता | भगवान विष्णु की पूजा और व्रत से पुण्य फल एवं पापों से मुक्ति की प्राप्ति |
अधिक मास के शुक्ल पक्ष में आती है। इसे सुख और मोक्ष प्रदान करने वाली माना जाता है। भगवान विष्णु व लक्ष्मीजी की पूजा से अनेक यज्ञों के समान फल की प्राप्ति।
| विवरण | तिथि / समय |
|---|---|
| एकादशी का नाम | पद्मिनी एकादशी |
| पक्ष | अधिक मास, शुक्ल पक्ष |
| एकादशी तिथि प्रारंभ | 26 मई 2026, सुबह 5:11 बजे |
| एकादशी तिथि समाप्त | 27 मई 2026, सुबह 6:22 बजे |
| व्रत रखने की तिथि | 27 मई 2026 (बुधवार) |
| व्रत पारण तिथि | 28 मई 2026 |
| पारण शुभ मुहूर्त प्रारंभ | सुबह 5:45 बजे |
| पारण शुभ मुहूर्त समाप्त | सुबह 7:57 बजे |
| धार्मिक मान्यता | शुभ मुहूर्त में पारण करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है |
अधिक मास के कृष्ण पक्ष में आती है। यह एकादशी कष्टों से मुक्ति दिलाती है। इस दिन व्रत रखने पर व्यक्ति को सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और पुण्य फल की प्राप्ति होती है। जीवन में सकारात्मकता की वृद्धि।
ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी सबसे पवित्र मानी जाती है। निर्जला व्रत रखने से वर्ष की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है। श्रद्धालुओं द्वारा स्टॉल लगाकर शीतल जल सेवा की जाएगी।
अपरा एकादशी का अर्थ होता है अपार पुण्य। पद्म पुराण के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा उनके वामन रूप में करने का विधान है। इसे जलक्रीड़ा, अचला और भद्रकाली एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धर्मग्रंथों में वर्णित है कि यह एकादशी बहुत पुण्य प्रदान करने वाली और पापों का नाश करने वाली है।
पं. मोहन लाल शर्मा, कृष्णामूर्ति ज्योतिषाचार्य
Updated on:
12 May 2026 05:04 pm
Published on:
12 May 2026 05:02 pm
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