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Adhik Maas 2026: 29 दिन बदल सकते हैं जीवन की दिशा, ज्योतिषाचार्य से जानें क्या करें और क्या नहीं

Purushottam Maas 2026 : 17 मई से शुरू हो रहा पुरुषोत्तम मास इस बार भक्तों के लिए खास आध्यात्मिक अवसर लेकर आया है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए जप, दान और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। लेकिन कुछ शुभ कार्यों पर रोक भी रहती है, जिसे जानना बेहद जरूरी है।

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भारत

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Manoj Vashisth

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ज्योतिषाचार्य राजेंद्र मुंजाल

May 17, 2026

Purushottam Maas 2026, Vishnu Puja Rules

Adhik Maas 2026 : अधिकमास में क्या नहीं करना चाहिए (फोटो सोर्स: AI@Gemini)

Adhik Maas 2026 : हिंदू पंचांग के अनुसार 17 मई 2026 से पवित्र अधिकमास यानी पुरुषोत्तम मास (Purushottam Maas 2026) की शुरुआत हो रही है। यह महीना हर तीन साल में एक बार आता है और धार्मिक दृष्टि से बेहद पुण्यदायी माना जाता है। इस बार यह विशेष महीना 15 जून 2026 तक रहेगा। मान्यता है कि इस पूरे समय भगवान विष्णु की आराधना (Vishnu Puja) करने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं और मानसिक शांति मिलती है। पद्म पुराण और विष्णु पुराण में पुरुषोत्तम मास का विशेष महत्व बताया गया है।

पुरुषोत्तम मास क्यों माना जाता है शुभ? (Purushottam Maas 2026)

ज्योतिषाचार्य राजेंद्र मुंजाल मानते हैं कि अधिकमास बाकी महीनों से अलग है, क्योंकि ये सामान्य कैलेंडर में अतिरिक्त समय की तरह आता है। धार्मिक ग्रंथों में इसे भगवान विष्णु के पुरुषोत्तम रूप को समर्पित बताया गया है, इसलिए इसका नाम पुरुषोत्तम मास है। संत-महात्मा कहते हैं कि ये महीना आत्मचिंतन, संयम और भक्ति का वक्त होता है। कई लोग इस दौरान अधिकमास व्रत कथा और विष्णु चालीसा का पाठ भी करते हैं।

क्यों खास होता है पुरुषोत्तम मास?

इस मास का ज्यादातर हिस्सा चंद्र और सूर्य की गणना के फर्क को संतुलित करने के लिए हर तीसरे साल जोड़ दिया जाता है। मान्यता ये भी है कि जब इस महीने को कोई देवता नहीं मिला तो विष्णु जी ने इसे अपना नाम दिया, तभी से ये पूजा के लिए खास हो गया।

धार्मिक विद्वान मानते हैं कि अगर कोई व्यक्ति इस दौरान अपने व्यवहार और सोच में सकारात्मक बदलाव लाता है, तो उसका असर लंबे समय तक रहता है.

अधिकमास 2026 में क्या करें?

भगवान विष्णु की पूजा

सबसे पहले भगवान विष्णु की पूजा। सुबह स्नान के बाद श्रीकृष्ण या विष्णु जी की आराधना बेहद शुभ मानी जाती है। पीले वस्त्र पहनना, तुलसी के पत्ते चढ़ाना और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करना आम परंपरा है।

जप, तप और भजन-कीर्तन

पुरुषोत्तम मास भक्ति का महीना है। मंदिरों में भजन-कीर्तन, कथा और सत्संग खूब होते हैं। इस वक्त ध्यान और मंत्र जाप मन को शांत करते हैं, और नकारात्मकता दूर करने में मदद मिलती है।

दान-पुण्य का विशेष महत्व

गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, जल, फल या धन का दान करना बहुत फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने किया गया दान कई गुना पुण्य देता है।

तुलसी पूजा और विष्णु सहस्रनाम

घर में तुलसी पूजा और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने की परंपरा भी इस दौरान विशेष मानी जाती है। कई भक्त रोज शाम को दीपक जलाकर भगवान विष्णु की आरती करते हैं।

अधिकमास में कौन से काम वर्जित माने जाते हैं?

शादी-विवाह और गृह प्रवेश

शादी, गृह-प्रवेश, मुंडन या नए व्यापार की शुरुआत जैसे मांगलिक काम टाल दिए जाते हैं। इस महीने को आध्यात्मिक अभ्यास के लिए रखा जाता है।

क्रोध और विवाद से दूरी

क्रोध, विवाद और कटु शब्दों से बचना चाहिए। अगर किसी को बुरी आदतें छोड़नी हैं जैसे शराब, सिगरेट तो ये महीना सबसे अच्छा समय है. संयम और अनुशासन का अभ्यास ही मुख्य संदेश है.

इस बार क्यों बढ़ी है अधिकमास की चर्चा?

धार्मिक संस्थाएं, मंदिरों में तैयारी जोरों पर है। विष्णु कथा, भागवत कथा और सामूहिक भजन-कीर्तन चलेंगे. लोग सोशल मीडिया पर भी नियम-उपाय ढूंढ रहे हैं.

ज्योतिषाचार्य मानते हैं कि भागदौड़ की जिंदगी में ये महीना मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन का मौका देता है। इसी वजह से अब युवाओं में भी ध्यान, मंत्र जाप और धार्मिक आयोजनों को लेकर दिलचस्पी बढ़ रही है।

आध्यात्मिक रूप से क्यों माना जाता है सबसे खास?

अधिकमास को भगवान का अतिरिक्त समय कहा जाता है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल सामान्य दिनों की तुलना में अधिक मिलता है। यही वजह है कि श्रद्धालु इस पूरे महीने को आत्मशुद्धि और ईश्वर भक्ति के अवसर के रूप में देखते हैं।

धार्मिक मान्यताओं से अलग देखें तो यह महीना व्यक्ति को अपनी जीवनशैली सुधारने, मन को शांत रखने और सकारात्मक सोच अपनाने की प्रेरणा भी देता है।