
Hindu astrology death in Malmaas|Freepik
Malmaas 2026 Death Facts:मलमास 2026 को लेकर लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि इस दौरान मृत्यु होना शुभ होता है या अशुभ संकेत। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अधिकमास यानी मलमास आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना गया है, जो भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस महीने में जहां मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है, वहीं मृत्यु को मोक्ष प्रदान करने वाला समय भी माना गया है। मान्यता है कि इस अवधि में देह त्यागने वाले व्यक्ति को विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं जयपुर के पंडित प्रमोद शर्मा से मलमास में मृत्यु से जुड़ी मान्यताओं और इसके रहस्य के बारे में विस्तार से।
मलमास 17 मई 2026 (रविवार) से 15 जून 2026 (सोमवार) तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह मास भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस अवधि में शरीर त्यागता है, उसकी आत्मा सीधे ईश्वर की शरण में पहुंचती है। ऐसी मृत्यु को सामान्य नहीं, बल्कि एक दिव्य अवसर माना जाता है, जहां आत्मा को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल सकती है।
कहा जाता है कि अधिकमास में मृत्यु होने पर व्यक्ति के पिछले कर्मों का भार कम हो जाता है। यह समय आत्मा की शुद्धि का होता है, इसलिए मृत्यु को एक तरह से मोक्ष का द्वार भी माना जाता है। यह सोच भय को कम करके एक आध्यात्मिक दृष्टिकोण देती है।
अगर किसी का देहांत इस माह में होता है, तो परिवार को घबराने के बजाय श्रद्धा और शांति के साथ कर्मकांड करने चाहिए। पिंडदान, दान-पुण्य और भगवान का स्मरण आत्मा की शांति के लिए लाभकारी माना जाता है।
“मलमास” शब्द सुनकर कई लोग इसे अशुभ समझ लेते हैं, जबकि सच्चाई इससे अलग है। यहां “मल” का अर्थ अपवित्र नहीं, बल्कि अतिरिक्त समय से है, एक ऐसा समय जो विशेष रूप से ईश्वर की साधना के लिए मिला है। इसलिए इसमें मृत्यु को भी अशुभ नहीं, बल्कि एक अलग आध्यात्मिक घटना के रूप में देखा जाता है।
Published on:
28 Apr 2026 02:03 pm
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