Kab Hai Sandhi Puja: नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर संधि काल में संधि पूजा का विधान है। इस समय ऊर्जा का स्तर अपने शिखर पर होता है। आइये जानते हैं कब है संधि पूजा और क्या है इसका महत्व
Sandhi Puja Date: हर नवरात्रि में अष्टमी की समाप्ति और नवमी की शुरुआत में संधि पूजा की जाती है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल, असोम, झारखंड के इलाकों में संधि पूजा की जाती है। मान्यता है कि इसी समय मां चामुंडा ने चंड-मुंड दैत्यों का वध किया था। आइये जानते हैं माघ नवरात्रि में कब होगी संधि पूजा
माघ शुक्ल अष्टमी तिथि प्रारंभः 05 फरवरी 2025 को सुबह 02:30 बजे (यानी 4 फरवरी की रात)
अष्टमी तिथि समापनः 06 फरवरी 2025 को सुबह 12:35 बजे (यानी 5 फरवरी की रात)
संधि पूजाः बुधवार 5 फरवरी 2025 की देर रात को (यानी 6 फरवरी को)
संधि पूजा प्रारंभः 6 फरवरी सुबह 12:11 बजे (यानी 5 फरवरी की रात)
संधि पूजा समापन का समयः 6 फरवरी सुबह 12:59 बजे (यानी 5 फरवरी की रात)
माघ संधि पूजा मुहूर्तः 6 फरवरी सुबह 12:11 बजे से 12:59 बजे तक (यानी 5 फरवरी की रात)
अवधिः 00 घंटे 48 मिनट
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धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अष्टमी तिथि की समाप्ति और नवमी तिथि के आरंभ में संसार में ऊर्जा का स्तर शिखर पर होता है। इसी संधि काल में देवी चामुंडा ने प्रकट होकर चंड मुंड नामक दैत्यों का वध किया था। इसी कारण इस समय संधि पूजा की जाती है। यह पूजा 2 घटी यानी 48 मिनट में संपन्न कर लेना चाहिए। कुंभ के दौरान इस तिथि के पड़ने से इसका महत्व और बढ़ गया है।