
Malayalam New Year 2026: सावन में मलयालम नववर्ष चिंगम की शुरुआत हो गई। मलयाली समाज के लोगों ने नववर्ष का स्वागत सत्कार किया। पारंपरिक मलयालम कैलेंडर (कोल्लावर्षम) के इस प्रथम माह के आगमन पर सांस्कृतिक और धार्मिक उत्साह का माहौल देखने को मिला।
मलयाली मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। देश-विदेश में स्थित भगवान अयप्पा के मंदिरों में 'चिंगम' के पहले दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। समाज के लोगों ने एक-दूसरे को नववर्ष की बधाइयां दी और घरो और पूजा स्थलो को आकर्षक फूलों की रंगोलियों (पुक्कलम) से सजाया।
मलयाली समाज के निदिश नायर ने बताया कि 'चिंगम' सौर कैलेंडर प्रणाली पर आधारित है, इसलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार इसकी तारीख हर साल बदलती है। इस वर्ष इसकी शुरुआत 17 अगस्त से हुई है। यह माह केरल में फसल कटाई की शुरुआत का प्रतीक है, जिसके चलते इसे 'किसान दिवस' के रूप में भी मनाया जाता है। हालांकि अप्रैल माह में 'विशु' पर्व को भी नववर्ष के रूप में देखा जाता है, लेकिन 'चिंगम' की पहली तिथि से ही आधिकारिक मलयालम नए साल की शुरुआत मानी जाती है।
ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, 'चिंगम' माह में ही प्रजावत्सल राजा महाबली अपनी प्रजा से मिलने के लिए धरती पर आते हैं। इसी खुशी में केरल का सबसे बड़ा और प्रसिद्ध 10 दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव 'ओणम' (Onam 2026) मनाया जाता है। मलयाली समुदाय ने आगामी दिनों में ओणम के आयोजनों की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। मंदिरों में अच्छी फसल, समृद्धि और किसानों की खुशहाली के लिए विशेष प्रार्थनाएं की गई।
ओणम का त्योहार राजा महाबली के स्वागत में मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा महाबली साल में एक बार अपनी प्रजा से मिलने पाताल लोक से धरती पर आते हैं। केरल के लोग इस दिन को हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। इस दिन ओणम सद्या का आयोजन कराया जाता है। ओणम सद्या एक पारंपरिक भोज है जिसमें केले के पत्ते पर 26 से अधिक प्रकार के व्यंजन परोसे जाते हैं। यह एकता और समानता का संदेश देता है क्योंकि इसे परिवार और समाज के सभी लोग मिलकर खाते हैं।