
Rakhi Tie Rules:रक्षाबंधन शुक्रवार को मनाया जाएगा। ज्योतिष विद्वानों और धर्माचार्यों के अनुसार रक्षासूत्र बांधने के साथ कुछ परंपराओं और नियमों का पालन किया जाता है। भाई का मुख पूर्व और बहन का पश्चिम दिशा (Raksha Bandhan Direction) की ओर होना शुभ माना गया है। साथ ही राखी तुरंत उतारने के बजाय कम से कम 21 दिन या जन्माष्टमी तक पहनने की परंपरा बताई गई है। असमय उतारने से प्रभाव घटता है-आचार्य जनार्दन शुक्ला के अनुसार रक्षासूत्र को कम से कम 21 दिन या श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami 2026) तक कलाई पर धारण करना चाहिए। इसके बाद इसे विधि-विधान से उतारकर सुरक्षित रखने की परंपरा है।
आचार्य दीपू तिवारी के अनुसार रक्षाबंधन पर स्नान के बाद पूजा की थाली में रोली, अक्षत, चंदन, मिष्ठान और राखी रखें। सबसे पहले एक रक्षासूत्र इष्टदेव, भगवान शिव या लड्डू गोपाल को अर्पित कर पूजा करें। इसके बाद भाइयों को राखी बांधने की परंपरा है।
आचार्य जितेंद्र दुबे ने बताया कि कलाई से उतारी गई राखी को लाल कपड़े में लपेटकर घर के मंदिर या सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए। अगले रक्षाबंधन पर नई राखी बांधने के बाद पुरानी राखी को नर्मदा या किसी पवित्र नदी में विसर्जित करने की परंपरा है।
स्वामी गिरिजानंद सरस्वती के अनुसार राखी टूट जाए तो उसे सुरक्षित नहीं रखना चाहिए। उसे अक्षत और सिक्के के साथ पीपल के पेड़ के नीचे अर्पित या नर्मदा के प्रवाह में प्रवाहित करने की परंपरा है। आचार्यों ने काली या खंडित राखी बांधने से भी परहेज की सलाह दी है।
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि राखी बंधवाते समय भाई का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। बहनों को पूजा की थाली में चावल, रौली, राखी, दीपक आदि रखना चाहिए। इसके बाद बहन को भाई के अनामिका अंगुली से तिलक करना चाहिए। तिलक के बाद भाई के माथे पर अक्षत लगाएं। अक्षत अखंड शुभता को दर्शाते हैं। उसके बाद भाई की आरती उतारनी चाहिए और उसके जीवन की मंगल कामना करनी चाहिए। कुछ जगहों पर भाई की सिक्के से नजर उतारने की भी परंपरा है।