बेंगलूरु. होसकोटे हाईवे मार्ग पर स्थित नवनिर्मित जय जीरावला तीर्थ के अंजनश्लाका प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए विराजित आचार्य चंद्रयश सूरीश्वर ने बुधवार को कहा कि सबसे पहले प्रभु से प्रीत करनी चाहिए। प्रभु से प्रीत ही सच्ची प्रीत होती है। जो परम आत्मिक सुख प्राप्त करा सकता है। संसार के बाकी तमाम सुख सिर्फ माया […]
बेंगलूरु. होसकोटे हाईवे मार्ग पर स्थित नवनिर्मित जय जीरावला तीर्थ के अंजनश्लाका प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए विराजित आचार्य चंद्रयश सूरीश्वर ने बुधवार को कहा कि सबसे पहले प्रभु से प्रीत करनी चाहिए। प्रभु से प्रीत ही सच्ची प्रीत होती है। जो परम आत्मिक सुख प्राप्त करा सकता है। संसार के बाकी तमाम सुख सिर्फ माया है। जो स्वयं नश्वर है, उन वस्तुओं से प्राप्त सुख भी नश्वर होते हैं। दूसरी प्रीत गुरुओं और तीसरी प्रीत माता-पिता से करनी चाहिए। जब इन तीनों से प्रीत होगी तो अवश्य घर में लक्ष्मी का वास होगा। प्रीत अपेक्षा रहित होनी चाहिए, तभी जीवन सुखमय हो सकेगा। आचार्य ने बताया कि गुरुवार से जीरावला तीर्थ के जीरावला पार्श्वनाथ भगवान की अंजनश्लाका प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव का विधि विधान प्रारंभ होगा। जिसमें प्रथम दिवस में क्षेत्रपाल पूजन, नवग्रह, दशदिक्पाल पूजन आदि के अलावा परमात्मा का च्यवन कल्याणक संबंधित विधि विधान होगा।