लाखों-करोड़ों खर्च पर कृषकों को नहीं मिल पाया बांध का लाभ
शहपुरा. प्रदेश में चाहे कोई भी सरकार हो किसी भी योजना को लाने के लिए करोडो रूपये खर्च करती ताकि आम आदमी को इसका सीधा फायदा मिल सके ठीक इसी प्रकार जल संसाधन विभाग के द्वारा जहां पर भी कृषकोंको बांध बनाकर सिचाई के लिए पानी उपलब्ध करवा सके ऐसी योजना बना कर सरकार के पास भेजती है और योजना पास होने काम करके जल्द से जल्द योजना को अमली जामा पहना काम को पूरा कर लोगो को लाभ दिलाने का प्रयास किया जाता है पर जब विभाग इन योजनाओं में हीला हवाली करता है तो हाल शहपुरा से पन्द्रह किलोमीटर दूर स्थित कछारी ग्राम में बने बांध जैसा होता है इस ग्राम में बांध का लोकार्पण 8 अपै्रल 1992 को किया गया था पर आज दिनांक तक ना तो बांध का कार्य पूरा हो सका और न ही नहरो का कार्य और न ही आज दिनंाक तक कृषकों को पानी ही मिल पाया है।
क्या है पूरा मामला
मध्यपद्रेश शासन के द्वारा कछारी जलाशय योजना के नाम जलसंसाधन विभाग के द्वारा कछारी ग्राम में जलाशय का निर्माण कराया गया जिसमें तत्कालीन भाजपा के राज्य मंत्री जल संसाधन नर्मदा घाटी विकास विभाग मध्यप्रदेश ओमकार प्रसाद तिवारी व क्षेत्रीय विधायक रामसिंह धुर्वे के द्वारा शिलान्यास 8 अप्रैल 1992 को किया गया था जो कई सालो में बनकर तैयार तो हुआ लेकिन उक्त बांध अनियमितताओं की भेंट चढ गया जिसके कारण लगभग तीन दशक बीतने के बाद भी ना तो इस बांध का कार्य पूरा हो पाया और न तो आज तक इस बांध की नहरे बन पाई जिसके कारण यहा के किसान अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे है। चूकि बांध बनने से जमीन भी चली गई और सिंचाई के लिए पानी भी नहीं मिल पा रहा है इसके अलावा विभाग की अनदेखी के चलते बांध भी जर्जर अवस्था में पहुच रहा है यह बांध बरसात में तो भर जाता है पर सीपेज होने के कारण गर्मी आते आते पूरा पानी बह जाता है इसके साथ ही सीपेज होने के कारण बांध के नीचे जो कृषकों की जमीन है वे सिर्फ एक ही फसल ले पा रहे है दूसरी फसल के लिए खेत नहीं सूख पाते जिससे रबी की फसल नहीं हो पा रही है।
कब बनेगी नहर
बांध बनने के बीसों साल बीतने के बाद भी नहर का निर्माण नहीं करवाया गया जिसके कारण यहां के ग्रामीणो ने कई बाद आला अधिकारियो से लेकर प्रदेश स्तर तक में शिकायत दर्ज करवाई जिसके बाद करीब तीन साल पहले नहर लाईन का कार्य तो प्रारंभ किया गया पर फिर जहां तहां नजर बना कर कार्य को बंद कर दिया गया और जो भी नहर का कार्य करवाया गया वह आज भी कच्चा पडा हुआ जिससे नहरे फिर से भर गई और अब सिर्फ नहर की लाइ्र्रन ही नजर आ रही है जिसके बाद किसानो को फिर निराशा ही हाथ लगी है।