नववर्ष में नगर को मिली बड़ी सौगातडिंडौरी. नगरवासियों के लिए नववर्ष 2026 एक बड़ी राहत और नई उम्मीद लेकर आया है। वर्षों से नगर की सबसे गंभीर और संवेदनशील समस्या मां नर्मदा में सीधे गिरते गंदे नालों पर अब निर्णायक रोक लगने जा रही है। यह वही समस्या थी जिसने लंबे समय से श्रद्धालुओं की […]
नववर्ष में नगर को मिली बड़ी सौगात
डिंडौरी. नगरवासियों के लिए नववर्ष 2026 एक बड़ी राहत और नई उम्मीद लेकर आया है। वर्षों से नगर की सबसे गंभीर और संवेदनशील समस्या मां नर्मदा में सीधे गिरते गंदे नालों पर अब निर्णायक रोक लगने जा रही है। यह वही समस्या थी जिसने लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचा रही थी, नर्मदा परिक्रमावासियों को व्यथित और नगरवासियों को शर्मिंदगी का एहसास करा रही थी। इस जटिल समस्या का समाधान प्रशासनिक दृढ़ता और दूरदर्शी नेतृत्व के चलते साकार होने जा रहा है। गुरुवार को पत्रकारों से चर्चा के दौरान कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने स्पष्ट किया कि माँ नर्मदा के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए शासन से 1 करोड़ 20 लाख रुपए की बहुप्रतीक्षित परियोजना स्वीकृत हो गई है। यह परियोजना न केवल नालों को रोकने की तकनीकी योजना है, बल्कि नर्मदा की पवित्रता और डिंडौरी की पहचान को बचाने का संकल्प भी है।
कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं प्रमुख अभियंता एमपीयूडीसी भोपाल से लगातार समन्वय किया। इतना ही नहीं, अपर मुख्य सचिव को डीओ पत्र भेजकर डिंडौरी नगर की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया। निरंतर प्रयासों का ही परिणाम है कि शासन ने इस परियोजना को विशेष प्राथमिकता देते हुए स्वीकृति प्रदान की। नववर्ष के पहले दिन से ही निर्माण एजेंसी ने कार्य प्रारंभ कर दिया है। प्रशासन का लक्ष्य है कि नर्मदा जयंती के पूर्व प्रथम चरण में कम से कम तीन नालों को नर्मदा में मिलने से पूरी तरह रोका जाए। आगामी तीन माह में पूरी परियोजना को धरातल पर उतारने की योजना है।
परियोजना के अंतर्गत चन्द्रविजय कॉलेज, ईमलीकुटी, रेहली मोहल्ला, गायत्री मंदिर, नर्मदा पुल क्षेत्र तथा श्मशान घाट के पास स्थित कुल 7 नालों को नियंत्रित किया जाएगा। नालों पर रिटेनिंग वॉल का निर्माण कर तथा लिफ्टिंग पम्पिंग स्टेशन स्थापित कर नालों के पानी को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाया जाएगा। शुद्धिकरण के बाद इस पानी का उपयोग कृषि और अन्य कार्यों में किया जाएगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ जल पुनर्चक्रण को भी बढ़ावा मिलेगा।