भोजन की थाली में पीडीएस का चावल परोसा गया। होटल को 28 लाख रुपए का भुगतान भी चेक से या ऑनलाइन न कर नगद कर दिया।
मुकेश देशमुख @दुर्ग. महिला एवं बाल विकास विभाग की एक महिला अधिकारी ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को रेसीडेंसियल प्रशिक्षण देने के लिए बाकायदा थ्री स्टार होटल बुक कराया। जहां खाने के लिए भोजन की थाली में पीडीएस का चावल परोसा गया। होटल को 28 लाख रुपए का भुगतान भी चेक से या ऑनलाइन न कर नगद कर दिया।
इस मामले का खुलासा प्रधानमंत्री कार्यालय से जांच कर रिपोर्ट मांगने पर हुआ। किसी ने इसकी शिकायत सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय में की थी। जहां से मामले की पूरी जांच करने के लिए विभाग को पत्र मिला। प्रधानमंत्री कार्यालय से जांच करने के लिए पत्र मिलने पर विभाग में हड़कंप मच गया। इसकी जांच विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी गुरुप्रीत कौर खुद कर रहीं हैं।
प्रशिक्षण के लिए सरकार से मिले थे 28 लाख
यह प्रशिक्षण मालवीय नगर स्थित होटल एवलान में किया गया था। महिला एवं बाल विकास विभाग ने दो अलग-अलग सत्र (आठ चरण में) के लिए होटल को बुक किया था। दुर्ग शहर, दुर्ग ग्रामीण और भिलाई नगर परियोजना के तहत कार्य करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया। इसके लिए केन्द्र शासन ने अलग-अलग सत्र में २८ लाख रुपए स्वीकृत किया था।
विभाग को इस राशि को नियमत: कैश लैस भुगतान करना था। विभाग के खाते से होटल संचालक के खाते में सीधा पैसा ट्रांसफर किया जाना था या फिर चेक के माध्यम से भुगतान किया जाना था। महिला एवं बाल विकास विभाग की चाइल्ड डेवपमेंट प्रोग्राम ऑफिसर नीरु सिंह ने होटल संचालक को नगद भुगतान कर दिया।
जानिए नोटबंदी के बाद क्या है भुगतान करने का सरकारी नियम
नोटबंदी के बाद सरकारी विभागों में भुगतान के लिए कड़े नियम बना गया हैं। जिसके तहत सिर्फ ५००० रुपए तक का भुगतान नगद किया जा सकता है। इससे अधिक की राशि को कैशलेस करना है। सरकारी तौर पर होने वाले आयोजन, प्रशिक्षण के खर्च का भुगतान किसी भी प्रतिष्ठान को ऑनलाइन या फिर चेक के माध्यम से ही करना है। सरकार के इस नियम की अनदेखी कर बड़ी रकम का भुगतान नगद किया गया।
पहले भी कर चुकी हैं आदेश की अवहेलना
पुलगांव स्थित बाल संप्रेक्षण गृह में उपद्रव व बच्चों के भागने की घटना होने पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने नीरु सिंह को अधीक्षक का प्रभार सौंपा था। उनके ही कार्यकाल में बाल संप्रेक्षण गृह में अपचारी बालक की हत्या हुई थी। जांच में मामला खुलासा हुआ कि किशोर न्यायालय ने अपचारी बालक के उम्र व अपराध को देखते हुए प्लेस ऑफ सेफ्टी सेल में रखने का आदेश दिया था। नीरुसिंह ने अपचारी बालक को बाल संप्रेक्षण गृह में रखा। जहां अपचारी बालकों में विवाद की स्थिति बनी और हत्या जैसी गंभीर वारदात हुई। इसके बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने उनसे संप्रेक्षणगृह का प्रभार वापस ले लिया।
पत्रिका ने ऐसे की पीडीएस के चावल की जांच
पत्रिका ने चावल की सच्चाई जानने के लिए प्रशिक्षण लेने वाली कार्यकर्ताओं से बात की। नाम न छापने की शर्त पर कार्यकर्ताओं ने बताया कि होटल में उन्हें परोसा गया चावल पीडीएस का ही था। देखने व खाने से ही समझ में आ गया था। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे एक गृहणी भी है इसलिए आसानी से जान सकती हैं कि कौन सा चावल किस तरह का है। आंगनबाड़ी में बच्चों को गर्म भोजन भी वे खिलाती हैं।
सुनने में ही यह अटपटा लगता है कि शहर के एक थ्री स्टार होटल में पीडीएस का चावल परोसा गया। लेकिन यह सच है। वह भी एक बार नहीं दो-दो प्रशिक्षण शिविर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पीडीएस का मोटा चावल खिलाया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग की चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोग्राम ऑफिसर नीरु सिंह ने कहा कि होटल एवलान क ो बिलासपुर की पार्टी ने लीज पर ले रखा है।
ऑनलाइन या चेक से पेमेंट करने पर पैसा होटल मालिक के खाते में जाता संचालक के खाते में नहीं। यही कारण था कि होटल संचालक के निवेदन को स्वीकार करते हुए हमने नगद भुगतान किया। जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी गुरप्रीत कौर ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय से शिकायत पत्र के साथ जांच का निर्देश मिला है। जांच मैं स्वयं कर रही हूं। जांच पूरी होने के बाद ही सही या गलत भुगतान हुआ है इसके बारे में कुछ कह पाउंगी।
पीएम ऑफिस ने डाक से भेजी शिकायत
मामले को आर्थिक अनियमितता से जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारी के मुताबिक पहले शिकायत कलेक्टर के समक्ष की गई थी। कोई कार्रवाई नहीं हुई तब शिकायतकर्ता ने प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत की। उन्होंने डाक के माध्यम से पूरी जानकारी व कई दस्तावेज प्रधानमंत्री कार्यालय दिल्ली भेजा। शिकायत मिलने पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने जांच पूरी कर रिपोर्ट मांगी है।
शासन का आदेश था कि प्रशिक्षण लेने वाली कार्यकर्ताओं को नाइट स्टे कराना है। प्रशिक्षण स्थल पर ही कार्यकर्ताओं के रुकने की व्यवस्था करनी है। विभाग के अधिकारियों ने होटल का केवल हॉल बुक किया था। ठहरने की व्यवस्था नहीं की थी। भारी भरकम खर्च करने के बाद भी कार्यकर्ता शाम को वापस घर लौट जाती थी।
एडवांस निकालकर किया भुगतान
होटल का भुगतान करने के लिए विभाग कीमहिला अधिकारी ने दो महिला पर्यवेक्षक के नाम पर एडवांस निकाला। जिसे विधिवत रजिस्टर में चढ़ाया गया। इसके बाद बाउचर में पेड बाई मी लिखकर होटल को भुगतान किया गया।
पहली बार प्रशिक्षण मार्च 2017 में हुआ था। सरकार ने इस प्रशिक्षण के लिए 13 लाख रुपए मंजूर किया था।आइसीटीआरटीएम के तहत दुर्ग शहर के 222 कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया।
दूसरी बार प्रशिक्षण कार्यक्रम फरवरी 2018 में हुआ। संस्कार अभियान के तहत दुर्ग ग्रामीण, शहर व भिलाई नगर के लगभग 590 कार्यकर्ताओं के लिए यह आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण के लिए केंद्र सरकार ने १५ लाख रुपए मंजूर किया था।