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छत्तीसगढ़ के 103 बंदियों ने 12वीं परीक्षा को किया पास, सलाखों के पीछे लिखी सफलता की नई कहानी

Central Jail Durg: दुर्ग केंद्रीय जेल से शिक्षा और आत्मपरिवर्तन की प्रेरक कहानी सामने आई है। आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक बंदी ने 12वीं परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास कर नई मिसाल पेश की है।

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Central Jail Durg

Central Jail Durg(photo-patrika)

Central Jail Durg: छत्तीसगढ़ के दुर्ग केंद्रीय जेल से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जो यह साबित करती है कि शिक्षा किसी भी व्यक्ति के जीवन को नई दिशा दे सकती है। आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक बंदी ने जेल की चारदीवारी के भीतर शिक्षा को अपना हथियार बनाया और कक्षा 12वीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कर नई मिसाल कायम की। यही नहीं, इस वर्ष केंद्रीय जेल दुर्ग में कुल 103 बंदियों ने विभिन्न कक्षाओं की परीक्षाओं में सफलता हासिल की है। यह उपलब्धि सुधारात्मक न्याय व्यवस्था और शिक्षा की ताकत को दर्शाती है।

Central Jail Durg: अशिक्षा से शिक्षा तक का प्रेरणादायक सफर

भिलाई के सुपेला निवासी विमल वर्ष 2018 से हत्या के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे हैं। जेल आने के समय वे पूरी तरह अशिक्षित थे। लेकिन जेल में रहते हुए उन्होंने अपने जीवन को बदलने का निर्णय लिया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और जेल प्रशासन के सहयोग से उन्होंने जेल में संचालित पाठशाला में प्रवेश लिया और पढ़ाई शुरू की। विमल ने कक्षा पहली से अपनी शैक्षणिक यात्रा शुरू की और लगातार मेहनत करते हुए 12वीं तक की पढ़ाई पूरी कर ली। यह सफर आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद हार नहीं मानी।

12वीं में प्रथम श्रेणी, अंग्रेजी में डिस्टिंक्शन

लगातार मेहनत और अनुशासन का परिणाम यह रहा कि विमल ने 12वीं बोर्ड परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। इतना ही नहीं, उन्होंने अंग्रेजी विषय में डिस्टिंक्शन प्राप्त कर सभी को चौंका दिया। जेल प्रशासन और शिक्षकों के अनुसार यह उपलब्धि केवल परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मसुधार की दिशा में एक बड़ी सफलता है।

शिक्षा ने बदली सोच और जीवन

विमल का कहना है कि शिक्षा ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने अपनी सजा पूरी होने के बाद शिक्षक बनने और बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया है। उनका मानना है कि यदि उन्हें पहले शिक्षा का महत्व समझ में आता, तो शायद उनका जीवन अलग दिशा में होता। उनकी यह सोच इस बात का प्रमाण है कि शिक्षा केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि व्यक्ति के विचार और व्यवहार को भी सकारात्मक दिशा देती है।

103 बंदियों ने हासिल की सफलता

केन्द्रीय जेल दुर्ग में शिक्षा और पुनर्वास के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वर्ष 2025-26 के शैक्षणिक सत्र में कक्षा पहली से लेकर एमए अंतिम वर्ष तक की परीक्षाओं में महिला और पुरुष बंदियों ने हिस्सा लिया। इनमें से 103 बंदियों ने सफलता हासिल की है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि जेल प्रशासन केवल बंदियों की निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और बेहतर भविष्य देने की दिशा में भी काम कर रहा है।

जेल में शिक्षा बन रही बदलाव का माध्यम

जेल प्रशासन द्वारा संचालित शैक्षणिक कार्यक्रमों के माध्यम से बंदियों को पढ़ाई का अवसर दिया जा रहा है। नियमित कक्षाओं, अध्ययन सामग्री और शिक्षकों के मार्गदर्शन से कई बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा बंदियों के पुनर्वास का सबसे प्रभावी माध्यम है। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है और वे भविष्य में समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए तैयार होते हैं।

प्रशासन और शिक्षकों की रही अहम भूमिका

इस सफलता के पीछे जेल अधीक्षक, जेल प्रशासन, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके सहयोग और मार्गदर्शन ने बंदियों को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर दिया। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे प्रयास आगे भी जारी रहेंगे, ताकि अधिक से अधिक बंदियों को शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से नई शुरुआत का अवसर मिल सके।

समाज के लिए प्रेरणादायक संदेश

विमल की कहानी यह संदेश देती है कि व्यक्ति का अतीत चाहे जैसा भी हो, यदि वह सकारात्मक सोच और मेहनत के साथ आगे बढ़े तो जीवन में बदलाव संभव है। केंद्रीय जेल दुर्ग में शिक्षा के माध्यम से हो रहा यह परिवर्तन सुधारात्मक न्याय व्यवस्था की सफलता का जीवंत उदाहरण है। यह समाज को भी यह सीख देता है कि हर व्यक्ति को सुधार और नई शुरुआत का एक अवसर अवश्य मिलना चाहिए।

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