
267 महिलाओं से करोड़ रुपए की ठगी (photo source- Patrika)
Bank Fraud: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में ग्रामीण महिलाओं को दिए जाने वाले ऋण से जुड़ा एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। धमधा थाना क्षेत्र में सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक और सेव फाइनेंशियल मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े इस मामले में 267 महिलाओं से वसूली गई ऋण किस्त और लोन क्लोजर की राशि में हेराफेरी कर 1 करोड़ 11 लाख 93 हजार 173 रुपये की धोखाधड़ी किए जाने का खुलासा हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शिकायत दर्ज होने के महज 24 घंटे के भीतर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।
पुलिस के अनुसार, सेव फाइनेंशियल मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड और सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड के बीच हुए अनुबंध के तहत ग्रामीण महिलाओं को ऋण उपलब्ध कराया जाता था। ग्राहकों से हर महीने ऋण की किस्त और लोन क्लोजर की राशि वसूली जाती थी, जिसे बैंक या कंपनी के खाते में जमा किया जाना था। मामले का खुलासा तब हुआ जब कंपनी ने नियमित ऑडिट कराया। ऑडिट रिपोर्ट में पाया गया कि 267 ग्राहकों से वसूली गई करोड़ों रुपये की राशि कंपनी के रिकॉर्ड में जमा ही नहीं हुई। हिसाब-किताब में भारी गड़बड़ी मिलने के बाद जांच शुरू की गई।
प्रारंभिक जांच में पता चला कि धमधा शाखा में पदस्थ कुछ कर्मचारियों और शाखा प्रबंधक ने ग्राहकों से वसूली गई राशि बैंक या कंपनी में जमा करने के बजाय उसका गबन कर लिया। कंपनी ने संबंधित कर्मचारियों को नोटिस जारी कर राशि जमा करने और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया, लेकिन न तो रकम लौटाई गई और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया गया।
इसके बाद कंपनी ने धमधा थाना में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 176/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5), 318(4) और 61(2) के अंतर्गत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए दुर्ग पुलिस ने तेजी से जांच शुरू की। तकनीकी साक्ष्यों, बैंक रिकॉर्ड और गवाहों के बयान के आधार पर दो संदिग्ध कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने ग्राहकों से वसूली गई राशि का गबन करने और धोखाधड़ी करने की बात स्वीकार कर ली। इसके बाद पुलिस ने उन्हें विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से दोनों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है— अनिल विश्वकर्मा (23 वर्ष) निवासी साजा, जिला बेमेतरा और संदीप कुमार खूंटीहरे (31 वर्ष), निवासी पाटन, जिला दुर्ग।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत ग्राहकों से प्राप्त ऋण की किस्त और लोन क्लोजर की राशि बैंक में जमा करने के बजाय अपने निजी उपयोग में खर्च कर दी। इस धोखाधड़ी से न केवल कंपनी को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की वित्तीय सुरक्षा और बैंकिंग व्यवस्था पर भी गंभीर असर पड़ा है।
पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में केवल दो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है, लेकिन इस पूरे घोटाले में अन्य कर्मचारियों की भूमिका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। बैंकिंग लेन-देन, ऑडिट रिपोर्ट और दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। फरार आरोपियों की तलाश के लिए भी पुलिस की टीमें लगातार कार्रवाई कर रही हैं।
इस मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र की महिलाओं में नाराजगी और चिंता का माहौल है। जिन महिलाओं ने नियमित रूप से अपनी ऋण किस्तें जमा की थीं, वे अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही हैं। यह मामला सीधे तौर पर उनकी आर्थिक सुरक्षा और बैंकिंग व्यवस्था पर विश्वास से जुड़ा हुआ है।
दुर्ग पुलिस ने इस मामले को गंभीर आर्थिक अपराध बताते हुए कहा है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी वित्तीय लेन-देन के दौरान अधिकृत माध्यमों का ही उपयोग करें, भुगतान की रसीद और दस्तावेज सुरक्षित रखें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और जैसे-जैसे नए तथ्य सामने आएंगे, इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
Updated on:
05 Jul 2026 06:51 pm
Published on:
05 Jul 2026 06:50 pm
