
OBC सर्वे में बड़ी गड़बड़ी (फोटो सोर्स- AI)
रायपुर@संतराम साहू। Chhattisgarh OBC Survey: छत्तीसगढ़ पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक सर्वेक्षण के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर की जा रही डेटा एंट्रियों में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। आयोग ने सर्वेक्षण डेटा के परीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में गलत और विरोधाभासी जानकारियां दर्ज होने पर नाराजगी जताई है। इसके बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों को तत्काल त्रुटियों में सुधार करने के निर्देश जारी किए हैं।
आयोग के पत्र के अनुसार, कई निकायों में परिवार प्रमुख की उम्र, विवाह के समय की उम्र और पति-पत्नी की उम्र संबंधी जानकारी में गंभीर विसंगतियां पाई गई हैं। कई मामलों में परिवार के सभी सदस्यों को अशिक्षित दर्शाया गया है, जबकि अन्य कॉलमों में दर्ज जानकारी उससे मेल नहीं खाती।
सर्वेक्षण में बड़ी संख्या में परिवारों की वार्षिक आय शून्य या एक समान दर्ज किए जाने, परिवार के सदस्यों को कामकाजी नहीं बताने व रोजगार संबंधी कॉलम खाली छोड़ने जैसी खामियां भी सामने आई हैं। आयोग ने आशंका जताई है कि कई जगह वास्तविक सर्वेक्षण की बजाय अनुमान के आधार पर डेटा भरा गया है। इतना ही नहीं, कई परिवारों के पास स्वयं का मकान दर्ज होने के बावजूद अचल संपत्ति नहीं होना दर्शाया (Chhattisgarh OBC Survey) गया है। कुछ मामलों में चल संपत्ति, वाहन और अन्य संसाधनों की जानकारी भी विरोधाभासी पाई गई।
आयोग ने यह भी पाया कि अनेक परिवारों को राशनकार्ड, आवास योजना, पेंशन और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने के बावजूद पोर्टल पर इसका उल्लेख नहीं किया गया है। वहीं, जाति प्रमाण-पत्र और आरक्षण से प्राप्त लाभ संबंधी कॉलम भी अधूरे या गलत भरे गए हैं।
आयोग ने नगर पंचायत पाली (जिला कोरबा) के एक प्रकरण का उदाहरण देते हुए बताया कि 55 वर्षीय महिला परिवार प्रमुख के पति की उम्र 21 वर्ष दर्ज कर दी गई। परिवार के पांचों सदस्यों को अशिक्षित और बेरोजगार बताया गया, जबकि अन्य विवरणों में कई तथ्य इससे मेल नहीं खाते। परिवार की वार्षिक आय शून्य तथा संपत्ति संबंधी जानकारी भी विरोधाभासी पाई गई।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी नगरीय निकायों को निर्देशित किया है कि 54 बिंदुओं वाले सर्वे प्रपत्र के अनुसार वास्तविक तथ्यों के आधार पर ही डेटा एंट्री की जाए। यदि किसी परिवार की जानकारी अधूरी है तो क्षेत्र स्तर पर संपर्क कर पूरी जानकारी जुटाने के बाद ही पोर्टल पर प्रविष्टि की जाए। अधिकारियों का मानना है कि गलत डेटा के आधार पर तैयार रिपोर्ट भविष्य में सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक योजनाओं के निर्धारण को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि अब सर्वेक्षण की गुणवत्ता सुधारने और त्रुटियों को दूर करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
Published on:
26 Jun 2026 09:18 am
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