देश में वित्तीय साक्षरता बढ़ाने के लिए जल्द ही स्कूलों के पाठ्यक्रम में वित्तीय शिक्षा को शामिल किया जाएगा।
देश में वित्तीय साक्षरता बढ़ाने के लिए जल्द ही स्कूलों के पाठ्यक्रम में वित्तीय शिक्षा को शामिल किया जाएगा। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के दिल्ली कार्यालय के क्षेत्रीय निदेशक ईई कार्तक ने सोमवार को एक कार्यक्रम में बताया कि वित्तीय शिक्षा पाठ्यक्रम का प्रारूप तैयार हो चुका है और इसे जल्द ही पाठ्य पुस्तकों में शामिल कर लिया जाएगा। कार्तक ने कहा कि छठी कक्षा से छात्रों को वित्तीय शिक्षा देने की योजना है। इसमें पारंपरिक और डिजिटल बैंकिंग में ग्राहकों के अधिकार, उनकी जिम्मेदारी तथा बैंकिंग की सामान्य जानकारी के साथ शेयर बाजार और निवेश के बारे में भी बताया जाएगा।
यह पाठ्यक्रम पेंशन फंड नियामक पीएफआरडीए, बीमा नियामक इरडा और शेयर बाजार नियामक सेबी के साथ मिलकर तैयार किया गया है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसइ) ने पाठ्यक्रम का प्रारूप तैयार कर लिया है। आरबीआई द्वारा सोमवार से आयोजित वित्तीय साक्षरता सप्ताह कार्यक्रम की दिल्ली क्षेत्र में शुरुआत करते हुए कार्तक ने कहा कि वित्तीय साक्षरता से वित्तीय समावेशन में मदद मिलती है। जानकर ग्राहक बेहतर ग्राहक बन सकते हैं। वे बाजार से नई नई जानकारियां मांगते हैं जो प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देती है।
कार्तक ने कहा कि आरबीआई ने छात्रों के अलावा किसानों, उद्यमियों, वरिष्ठ नागरिकों और स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय शिक्षा देने पर फोकस किया है। इसके लिए नौ राज्यों के 80 प्रखंडों में एक पायलट परियोजना चलाई जा रही है। छह गैर-सरकारी संगठन अब तक इस पायलट परियोजना से जुड़ चुके हैं।
इसके लिए 10 बैंकों के साथ समझौता किया गया है। पायलट परियोजना के आधार पर भविष्य के लिए बेहतर रणनीति तैयार की जाएगी। ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) के प्रबंध निदेशक एम.के. जैन ने कहा कि 18 साल से ज्यादा की उम्र की देश की 76 प्रतिशत आबादी को वित्तीय मामलों के बारे में मूलभूत जानकारी तक नहीं है।
पंजाब एंड सिंध बैंक के कार्यकारी निदेशक फरीद अहमद ने कहा कि वित्तीय समावेशन के तमाम प्रयासों के बावजूद देश की 19 प्रतिशत आबादी बैंकिं सेवाओं से वंचित है और इसके लिए वित्तीय साक्षरता का नहीं होना एक बड़ा कारण है। वित्तीय साक्षरता सिर्फ एक सप्ताह तक सीमित न रह कर सतत प्रक्रिया बने।
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) के महाप्रबंधक बी. शंकर ने कहा कि नोटबंदी के बाद डिजिटलीकरण बढ़ा है। इसके साथ ही वित्तीय साक्षरता का दायरा भी डिजिटल बैंंकिंग तक फैल गया है। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के कार्यकारी निदेशक एल.वी. प्रभाकर और नाबार्ड महाप्रबंधक राजीव ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।
ग्राहकों के बैंकिंग संबंधी जोखिमों से बचाव और अधिकारों के प्रति उन्हें जागरूक करने के लिए रिजर्व बैंक (आरबीआई) वर्ष 2016 से वित्तीय साक्षरता सप्ताह का आयोजन करता है। इस साल 04 से 08 जून तक देश भर में - विशेष कर वित्तीय रूप से पिछड़े एवं वंचित इलाकों में - इसका आयोजन किया जा रहा है जिसके तहत बैंकों की शाखाओं में कार्यशालाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। इस साल वित्तीय साक्षरता सप्ताह का थीम ‘ग्राहक संरक्षण’ रखा गया है। सप्ताह के दौरान बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर ग्राहकों को चार विषयों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
इसमें फर्जी निवेश योजनाओं के झाँसे में न आने, बैंकिंग संबंधी शिकायत के लिए ‘बैंकिंग लोकपाल’ व्यवस्था के प्रयोग, सुरक्षित डिजिटल लेनदेन के लिए क्या करें, क्या न करें और अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन में ग्राहक तथा बैंकों की देयता के बारे में बताया जाएगा। वित्तीय रूप से पिछड़े एवं वंचित इलाकों में सभी बैंकों की शाखाओं में कार्यशालाओं, शिविरों, प्रश्नोत्तरी तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगों को जागरुक करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा देश भर में सभी बैंकों से पोस्टरों के जरिए इन विषयों के बारे में जागरूकता फैलाने को कहा गया है। सभी एटीएम की स्क्रीनों पर भी ये पोस्टर डिस्प्ले किये जा रहे हैं। सभी पोस्टर स्थानीय भाषाओं में हैं।