भारतीय नर्सिंग परिषद (आइएनसी) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, 2019 के बाद स्थापित नर्सिंग कॉलेजों में संचालन शुरू करने के लिए मूल अस्पताल के रूप में 100 बिस्तरों वाला अस्पताल होना चाहिए
-दाखिला प्रक्रिया पर लगी रोक
बेंगलूरु. कोरोना महामारी Corona pandemic के बाद से राज्य Karnataka में नर्सिंग पाठ्यक्रमों की मांग बढ़ी है। कई छात्र ऐसे कॉलेजों में दाखिला ले बैठते हैं, जो निर्धारित मानदंडों पर खरे नहीं उतरते हैं। इस बार राज्य के 75 कॉलेजों पर राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (आरजीयूएचएस) की गाज गिरी है। आरजीयूएचएस ने इन कॉलेजों को शैक्षणिक वर्ष 2024-24 के लिए दाखिला लेने से रोक दिया है। राज्य के 615 नर्सिंग कॉलेज आरजीयूएचएस के अंतर्गत आते हैं। इनमें से ज्यादातर कॉलेज बेंगलूरु में हैं।
कमियां और उल्लंघन चरम पर
आरजीयूएचएस के कुलपति डॉ. एम. के. रमेश ने कहा कि 75 कॉलेजों में नियमों का उल्लंघन और कमियां पाई गईं। इसलिए हमने इन्हें बंद करने का सुझाव दिया है। आरजीयूएचएस के अधिकारियों की एक टीम फिर से निरीक्षण के लिए इन कॉलेजों का दौरा करेगी। अगर समस्याएं बनी रहीं, तो सख्त कार्रवाई होगी।
सावधानी बरते भावी छात्र
Bengaluru के एक निजी नर्सिंग कॉलेज Nursing College की व्याख्याता ने कहा कि भारतीय नर्सिंग परिषद (आइएनसी) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, 2019 के बाद स्थापित नर्सिंग कॉलेजों में संचालन शुरू करने के लिए मूल अस्पताल के रूप में 100 बिस्तरों वाला अस्पताल होना चाहिए। हालांकि, राज्य के कई कॉलेजों ने इस नियम का पालन नहीं किया है। दाखिला लेने से पहले भावी छात्रों और अभिभावकों को संबंधित कॉलेजों की संबद्धता जांच लेनी चाहिए। कॉलेज के बुनियादी ढांचे सहित उसके बारे में व्यापक जानकारी एकत्र करनी चाहिए।
सीइटी समाधान
एक अन्य व्याख्याता के अनुसार सीइटी के माध्यम से ही सभी नर्सिंग कॉलेजों में दाखिले होने चाहिए। आवश्यक मानकों को पूरा नहीं करने वाले कॉलेज अपने आप ही प्रवेश प्रणाली से बाहर हो जाएंगे। इससे नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता को विनियमित करने में मदद मिलेगी और यह सुनिश्चित होगा कि छात्रों को अच्छी तरह से सुसज्जित संस्थानों में उचित प्रशिक्षण मिले।