
बालोद जिले के 56 गांवों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने वाली 56.04 करोड़ रुपए की हीरापुर सामूहिक जलप्रदाय योजना छह माह से ठप है। वर्ष 2022 में स्वीकृत परियोजना 2026 में भी अधूरी है। संपवेल, फिल्टर प्लांट और पाइपलाइन विस्तार के काम पूरे नहीं होने से 78,791 लोगों तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य अटका है। निर्माण में देरी के बीच ठेकेदार की कार्यप्रणाली और विभागीय निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।
योजना के तहत तांदुला जलाशय के पानी को शोधित कर बालोद और गुंडरदेही विकासखंड के 56 गांवों की टंकियों तक पहुंचाया जाना है। वहां से घरेलू नल कनेक्शन के जरिए पेयजल उपलब्ध कराने की योजना है।
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कई गांवों में भूजल में फ्लोराइड और लाल पानी की समस्या है। योजना पूरी होने से ग्रामीणों को इससे राहत मिलने की उम्मीद थी; लेकिन निर्माण में देरी के कारण उन्हें अब भी वैकल्पिक जलस्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
पीएचई विभाग के एसडीओ विशाल नेताम ने बताया कि काम अधूरा होने पर ठेकेदार को नोटिस जारी कर जल्द निर्माण शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। काम शुरू नहीं होने पर टेंडर निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। परियोजना में देरी के कारणों पर कार्यपालन अभियंता सागर वर्मा से प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।
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स्वीकृति वर्ष : 2022
लागत: 56.04 करोड़ रुपए
जलस्रोत: तांदुला जलाशय
लाभान्वित गांव: 56
लाभार्थी आबादी: 78,791
लाभान्वित गांवों में हीरापुर, झलमला, सिवनी, औराभाठा, देउतराई, पाकुरभाट, जगतरा, देवारभाट, तालगांव, सेमरकोना, उमरादाह, चरोटा, परसोदा, सोहतरा, चिचबोड़, अंगारी, मटिया-बी, साल्हेटोला, जमरूवा, सांकरा-क, चिरईगोंडी, जामगांव-बी, करहीभदर, कन्नेवाड़ा, मुजगहन, बरही, हथौद, पडक़ीभाट, नेवारीखुर्द, टेकापार, लाटाबोड़, अरौद, सांकरी, मोंगरी, पैरी, लिमोरा, मडियापार, मनहोरा, सिकोसा, सलौनी, फुलझर, दनिया, जुनवानी, बिरेतरा, भाठागांव बी, ईरागुड़ा, पिनकापार, चारभाटा, कोडेवा, खुटेरी ख, खेरुद, सनौद, चंदनबिरही, नवागांव (च), रेंगाकठेरा, खुटेरी रंग, गुंडरदेही शामिल हैं।