गोंडा में पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने ट्रंप के भारत-पाक युद्ध रोकने के दावे को खारिज किया। बोले- पाकिस्तान भारत का सामना नहीं कर सकता। सोशल मीडिया पर सख्त कानून की मांग की। राहुल गांधी को लेकर बड़ा बयान दिया।
गोंडा में एक शादी समारोह में पहुंचे पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत-पाक युद्ध रोकने संबंधी दावे को खारिज किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप अक्सर विवादित बयान देकर चर्चा में बने रहते हैं। भारत की स्थिति मजबूत है। पाकिस्तान भारत का सामना नहीं कर सकता। इस समय पाकिस्तान ट्रंप की गोद में बैठा है।
गोंडा में मीडिया से बातचीत के दौरान पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे पर प्रतिक्रिया दी। जिसमें उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाने की बात कही थी। बृजभूषण ने कहा कि ट्रंप हमेशा विवादित बयान देकर सुर्खियों में बने रहना चाहते हैं। दुनिया उनके बयानों को गंभीरता से नहीं लेती। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में भारत की स्थिति बेहद मजबूत है। पाकिस्तान भारत को धमकी देकर डराने की स्थिति में नहीं है। अगर युद्ध कुछ दिन और चलता तो पाकिस्तान को भारी नुकसान उठाना पड़ता। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध में फाइटर जेट गिरना असामान्य नहीं है। यदि युद्ध होगा तो दोनों पक्षों को नुकसान होगा। लेकिन वर्तमान हालात में पाकिस्तान भारत का सामना नहीं कर सकता।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर राहुल गांधी के ट्वीट पर उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर देशों को आपसी तालमेल के साथ चलना पड़ता है। दुनिया अब एक मंच की तरह हो गई है। जहां दूरी मायने नहीं रखती। उन्होंने राहुल गांधी पर जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका नहीं निभाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वे लगातार अपनी विश्वसनीयता खो रहे हैं।
यूजीसी से जुड़े नए कानून पर सुप्रीम कोर्ट की रोक और उसके खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर बृजभूषण ने कहा कि यह मामला अब अदालत में विचाराधीन है। इसलिए किसी को भी अनावश्यक बयानबाजी नहीं करनी चाहिए। समाज को बांटने के बजाय सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए।
सुल्तानपुर में राहुल गांधी की मानहानि मामले में पेशी पर उन्होंने कहा कि यदि कोई विवादित बयान देगा। तो कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर बढ़ती अभद्र भाषा पर भी चिंता जताई। कहा कि इस पर सख्त कानून बनाया जाना चाहिए। उनके मुताबिक सोशल मीडिया ने जागरूकता बढ़ाई है। लेकिन अपशब्दों और धमकियों पर कठोर कार्रवाई जरूरी है।