
UP Mid Day Meal: उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए मिड डे मील तैयार करने वाले रसोइयों के लिए बड़ी राहत की खबर है। योगी सरकार ने रसोइयों के मासिक मानदेय में 1000 रुपये की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। अब उन्हें हर महीने 2000 रुपये के बजाय 3000 रुपये मानदेय मिलेगा। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के करीब 3.53 लाख रसोइयों को सीधा लाभ मिलेगा। बढ़ा हुआ मानदेय सितंबर से लागू किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में मिड डे मील तैयार करने वाले रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी का फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के माध्यम से मानदेय बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके बाद अब रसोइयों को हर महीने 2000 रुपये के बजाय 3000 रुपये मानदेय दिया जाएगा। सरकार के इस फैसले का लाभ प्रदेश में काम कर रहे करीब 3.53 लाख रसोइयों को मिलेगा। बढ़ा हुआ मानदेय सितंबर से लागू माना जाएगा। इसकी राशि अक्टूबर में मिलने वाले मानदेय में जोड़कर दी जाएगी। इस बढ़ोतरी से राज्य सरकार के खजाने पर हर महीने करीब 35.35 करोड़ रुपये और सालाना लगभग 424 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।
स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाले रसोइयों को शुरुआत में सिर्फ 1000 रुपये प्रति माह मानदेय दिया जाता था। उस समय इसमें 600 रुपये केंद्र सरकार और 400 रुपये राज्य सरकार की हिस्सेदारी थी। वर्ष 2019 में मानदेय बढ़ाकर 1500 रुपये किया गया। इसके बाद रसोइयों की लगातार मांग को देखते हुए वर्ष 2022 में मानदेय में फिर बढ़ोतरी हुई। इसे 2000 रुपये प्रति माह कर दिया गया। इसमें 600 रुपये केंद्रांश और 1400 रुपये राज्यांश शामिल था। अब राज्य सरकार ने इसमें एक हजार रुपये और जोड़ते हुए मासिक मानदेय 3000 रुपये कर दिया है।
रसोइयों को मानदेय के अलावा 500 रुपये यूनिफॉर्म और 400 रुपये ग्लव्स के लिए भी दिए जाते हैं। प्रदेश के करीब 1.41 लाख परिषदीय और एडेड स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 1.46 करोड़ विद्यार्थियों के लिए मिड डे मील तैयार करने की जिम्मेदारी रसोइयों की होती है। रसोइये लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे थे। इससे पहले परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में बढ़ोतरी की गई थी। अब रसोइयों का मानदेय बढ़ाए जाने से उन्हें भी आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार के इस फैसले को स्कूलों में मिड डे मील व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों के लिए अहम कदम माना जा रहा है।