त्योहारों के इस मौसम में मिलावटखोरों का धंधा भी चरम पर है। खाद्य विभाग की टीमें लगातार छापेमारी की कारवाई कर रही हैं। इसी क्रम में शनिवार को टीम को नकली घी बनाने की पूरी फैक्ट्री ही मिल गई। यहां ऊपर तो सामान्य तरीके से मिठाइयां वगैरह बन रही थीं लेकिन नीचे तहखाने में जाने पर टीम के होश उड़ गए।
जिले में दिपावली से पहले खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की टीम ने नकली वनस्पति घी बनाने वाली फैक्ट्री पकड़ी है। यह फैक्ट्री चिलुआताल इलाके के गायत्रीपुरम में तहखाने के अंदर चल रही थी। कारखाना में ऊपर तो पनीर, खोवा और पेड़ा तैयार किया जा रहा था। जबकि, अंदर तहखाना में नकली घी की फैक्ट्री चल रही थी। जिसका प्रोपराइटर मेघन कुमार यादव है।शुरूआती जांच में सामने आया है कि वनस्पति घी में एसेंस मिलाकर देसी घी तैयार किया जा रहा था। जो स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक है। फिलहाल टीम ने फैक्ट्री को सील कर नमूने लिए और उसे जांच के लिए लैब में भेजा गया है।
जांच रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत फैक्ट्री संचालक पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।दरअसल, गोरखपुर के सहायक आयुक्त खाद्य (सकेंड) डॉ. सुधीर कुमार सिंह के निर्देशन में मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी हितेंद्र मोहन त्रिपाठी के मार्गदर्शन में फूड विभाग टीम लगातार मिलावटखोरी के अड्डे पर छापेमारी की कार्रवाई की जा रही है।ऐसे में शनिवार को टीम जब नकली घी के कारखाना पर छापा मारने पहुंची तो वहां पर सिर्फ कर्मचारी ही मौजूद थे। पहले तो फूड विभाग के अधिकारियों को कर्मचारी अंदर नहीं जाने दे रहे थे। इसके बाद टीम के सदस्य गेट फांद कर अंदर पहुंचे तो उनके होश उड़ गए। शहर में इतनी बड़े पैमाने पर अवैध वनस्पति घी की फैक्ट्री चल रही थी। इस दौरान टीम ने पांच नमूने संग्रहित कर जांच के लिए भेजा गया है। साथ ही टीम ने फैक्ट्री को सील कर दिया।
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी हितेंद्र मोहन त्रिपाठी ने बताया, शासन के निर्देश पर मिलावटखोरी पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। आम जनमानस के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। शासन की मंशा है कि आम जनमानस को शुद्ध खाद्य पेय पदार्थ उपलब्ध हो। ऐसे में यह कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।