कानून को तोड़नेवालों को सात साल की सजा और पांच लाख तक जुर्माना देना होगा। राज्य के गृह विभाग की प्रधान सचिव एल सांगसन ने कहा कि राष्ट्रपति के विधेयक को लेकर आए कई सवालों के उत्तर के बाद 13 जून को इसे मंजूरी प्रदान की गई।
राजीव कुमार
गुवाहाटी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने असम डायन हत्या रोकथाम कानून 2015 को अनुमोदित कर दिया है। इस कानून के बाद डायन हत्या गैर जमानती अपराध माना जाएगा। डायन कहने से सश्रम कारावास होगा। वर्ष 2015 में असम विधानसभा में यह विधेयक पारित हुआ था। कानून को तोड़नेवालों को सात साल की सजा और पांच लाख तक जुर्माना देना होगा। राज्य के गृह विभाग की प्रधान सचिव एल सांगसन ने कहा कि राष्ट्रपति के विधेयक को लेकर आए कई सवालों के उत्तर के बाद 13 जून को इसे मंजूरी प्रदान की गई।
जल्दी ही जारी होगी गजट अधिसूचना
असम सरकार के सूत्रों की मानें, तो जल्दी ही कानून पर गजट अधिसूचना जारी हो जाएगी। इस पर राज्य के पुलिस महानिदेशक कुलधर सैकिया ने कहा कि डायन हत्या के खिलाफ और अधिक कठोर कदम उठाए जाएंगे। इसके लिए पुलिस के साथ ही जनता की जागरुकता काफी जरूरी है। समाज में सजगता आने से ही समस्या का हल होगा। राष्ट्रपति द्वारा इस कानून को मंजूरी जरुरी थी, क्योंकि इसमें भारतीय दंड विधान का मामला है। राज्य में वर्ष 2002 से 17 सालों तक 130 लोगों की हत्या डायन बताकर की जा चुकी है।
2013 में ही दाखिल हुई थी याचिका
अधिवक्ता राजीव कलिता ने राज्य में लगातार हो रही डायन हत्या को देखते हुए 2013 में गौहाटी उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की थी। उन्होंने अदालत से राज्य में एक डायन विरोधी कानून के लिए अनुरोध किया था। राज्य में अंधविश्वास के चलते गांवों में लोगों को डायन बताकर हत्या कर दी जाती है। चाय बागान में लोग बीमार पड़ने से भी डायन का प्रकोप मानकर किसी को निशाने पर ले लेते हैं।
बिहार, ओडिसा, झारखंड, महाराष्ट्र में है डायन विरोधी कानून
राज्य सरकार ने पिछले बजट अधिवेशन में सदन में जानकारी दी थी कि वर्ष 2006 से राज्य में डायन बताकर 80 महिलाओं की हत्या की गई है। बिहार, ओडिसा, झारखंड और महाराष्ट्र में डायन विरोधी कानून है।पर कहा जा रहा है कि असम का कानून इन सबसे ज्यादा कठोर है। कानून के लागू होने के बाद राज्य में डायन हत्याओं में कमी आने के आसार हैं।