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Patrika Explainer: असम में UCC बिल पेश, लिव-इन कपल्स और उनके बच्चों को लेकर कानून में क्या-क्या बदला?

Assam Uniform Civil Code Bill: असम यूसीसी विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। इसमें विवाह और तलाक के पंजीकरणों के साथ-साथ ऐसे पंजीकरणों को संभालने के लिए रजिस्ट्रारों की नियुक्ति सहित प्रशासनिक तंत्र के गठन का भी प्रस्ताव है।

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Uniform Civil Code

Uniform Civil Code (photo:patrika creative)

Assam UCC bill 2026: असम सरकार ने 25 मई विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल 2026 पेश किया। यह बिल विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक समान कानून लाने का प्रयास है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के अनुसार, यह बिल संविधान के अनुच्छेद 44 के निर्देशक सिद्धांतों पर आधारित है। असम भाजपा शासित तीसरा राज्य है (उत्तराखंड और गुजरात के बाद) जहां UCC की दिशा में कदम उठाया गया है। बिल में अनुसूचित जनजातियों (ST) को पूरी तरह छूट दी गई है, जो राज्य की आबादी का करीब 12.45 प्रतिशत हैं। आपको बता दें कि फरवरी 2024 में उत्तराखंड यूसीसी कानून पारित करने वाला देश का पहला राज्य बना था।

लिव-इन कपल्स के लिए बिल में क्या नया प्रावधान है?

बिल लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी रूप से मान्यता देने और रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य बनाने का प्रावधान करता है। यह पहली बार असम में लिव-इन संबंधों के लिए वैधानिक ढांचा तैयार करेगा। रजिस्ट्रार की नियुक्ति की जाएगी जो विवाह-तलाक के साथ-साथ लिव-इन रजिस्ट्रेशन भी संभालेगा। हिमंता सरमा के मुताबिक, रजिस्ट्रेशन से पार्टनर्स और उनके बच्चों के अधिकारों की औपचारिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

लिव-इन से पैदा बच्चों के अधिकारों पर क्या बदलाव?

बिल लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों को संपत्ति उत्तराधिकार और अन्य कानूनी अधिकार प्रदान करने का प्रावधान करता है। इससे बच्चों को पिता की संपत्ति में हिस्सा मिल सकेगा और मां-बच्चे की सुरक्षा भी बढ़ेगी। परित्याग (छोड़ भागना) की स्थिति में महिलाओं और बच्चों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी। यह एक समान उत्तराधिकार प्रणाली स्थापित करेगा, जो विभिन्न धर्मों के बीच अंतर को समाप्त करेगा।

पॉलीगैमी और अन्य प्रावधान क्या हैं?

बिल पॉलीगैमी (बहुविवाह) पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है। विवाह की न्यूनतम आयु पुरुष के लिए 21 और महिला के लिए 18 वर्ष तय की गई है। विवाह और तलाक का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन होगा। महिलाओं को पारिवारिक संपत्ति में अधिकार दिए जाएंगे। बिल गोवा, उत्तराखंड और गुजरात के UCC मॉडल से प्रेरित है, जहां लिव-इन रजिस्ट्रेशन एक महीने के अंदर अनिवार्य है और गैर-अनुपालन पर जुर्माना या सजा का प्रावधान है। असम में भी इसी दिशा में प्रावधान होने की संभावना है।

अभी क्या-क्या जानकारी नहीं है?

पूर्ण बिल का विस्तृत टेक्स्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। रजिस्ट्रेशन की समय-सीमा, गैर-अनुपालन पर सजा, जरूरी दस्तावेज और सत्यापन प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है। 27 मई को बहस के दौरान और पूर्ण बिल प्रकाशित होने पर ये डिटेल्स सामने आएंगी। कुछ प्रावधानों (जैसे प्राइवेसी संबंधी) पर उत्तराखंड में संशोधन हुए थे, असम में भी ऐसा हो सकता है।

जेल और जुमाने का प्रावधान

उत्तराखंड का यूसीसी एक मिसाल है जिसको असम अपना रहा है। जनवरी 2025 में लागू हुए इस कानून के तहत, जोड़ों को अपने लिव-इन रिलेशनशिप में आने के एक महीने के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य है। इसका पालन न करने पर तीन महीने तक की कैद, 10,000 रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। रजिस्ट्रार को यह भी अनिवार्य है कि यदि कोई भी साथी 21 वर्ष से कम आयु का है तो उसके माता-पिता को सूचित करें और संबंध समाप्त होने की सूचना भी स्थानीय पुलिस को देनी होगी।

विपक्ष और अन्य प्रतिक्रियाएं

कांग्रेस, रायजोर दल और तृणमूल कांग्रेस ने बिल का विरोध किया और व्यापक परामर्श की मांग की। कुछ मुस्लिम महिलाएं पॉलीगैमी पर प्रतिबंध का समर्थन कर रही हैं। बिल 2026 विधानसभा चुनावों में भाजपा के वादे को पूरा करता है।

जानें यूसीसी पर क्या बोली कांग्रेस

असम विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश किए जाने पर कांग्रेस विधायक डॉ. जॉयप्रकाश दास ने कहा, 'सबसे पहले तो, वे यूसीसी क्यों लाए हैं? उन्होंने कहा है कि आदिवासी लोगों को इससे छूट दी जाएगी। कांग्रेस पार्टी का रुख बिल्कुल स्पष्ट है कि हम इसका विरोध करेंगे। यूसीसी इतना बड़ा मुद्दा है कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर भी इस पर चर्चा करने से डरते थे क्योंकि हमारे समाज में विविधता है और लोग भी विविध हैं। हर समुदाय को अपने धर्म, रीति-रिवाजों और अन्य प्रथाओं का पालन करने का अधिकार है। लेकिन अब वे किसी राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। अभी यह सही समय नहीं है क्योंकि पूरी दुनिया आर्थिक मंदी से गुजर रही है।'