
ग्वालियर. जीआरएमसी के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं सुधारने का नाम नहीं ले रही हैं। पिछले सात साल से डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे अस्पताल की स्थिति अब और बिगड़ गई है। यहां के एकमात्र गैस्ट्रो सर्जन डॉ. आशीष श्रीवास्तव को वापस जयारोग्य अस्पताल (जेएएच) भेज दिया गया है। तीन साल पहले उन्हें जेएएच से सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल भेजा गया था। उनके तबादले के बाद अब अस्पताल में एक भी गैस्ट्रो सर्जन नहीं बचा है और विभाग की सेवाएं प्रभावित हो गई हैं।
भर्ती के बाद भी नहीं आए डॉक्टर
हाल ही में अस्पताल में नए डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया पूरी हुई थी। इसके बावजूद चयन के नौ दिन बाद भी यूरोलॉजी और गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी के डॉक्टरों ने अस्पताल में ज्वाइन नहीं किया है। इससे मरीजों को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद भी नजर नहीं आ रही है।
पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियों के मरीज हो रहे परेशान
गैस्ट्रो सर्जन के नहीं होने से पेट और आंत से जुड़ी गंभीर बीमारियों के मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है। करोड़ों रुपए की लागत से उपलब्ध कराई गई आधुनिक मशीनों का उपयोग भी नहीं हो पा रहा है। ओपीडी और सर्जरी बंद होने से गरीब और दूर-दराज से आने वाले मरीजों को इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
30 से ज्यादा मरीज आते हैं ओपीडी में…
सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में हर विभाग की अलग-अलग दिन ओपीडी संचालित होती है। इसी के तहत गैस्ट्रो सर्जरी विभाग की ओपीडी सप्ताह में दो दिन लगती है। इन दोनों दिनों में हर दिन 30 से अधिक मरीज इलाज और परामर्श के लिए पहुंचते हैं। वहीं सप्ताह के अन्य दिनों में मरीजों की सर्जरी की जाती है। गैस्ट्रो सर्जन के तबादले के बाद अब डॉक्टर के नहीं होने से ओपीडी और सर्जरी दोनों बंद हो गई हैं। इससे पेट और आंत से जुड़ी गंभीर बीमारियों के मरीजों के सामने इलाज का संकट खड़ा हो गया है।
इनका कहना है
जेएएच में सर्जन की कमी को देखते हुए सुपर स्पेशलिटी से डॉक्टर को भेजा गया है। डॉ. श्रीवास्तव की नियुक्ति जेएएच में ही हुई है, इसलिए उन्हें वहां भेजा गया है। सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में डॉक्टरों की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है।
डॉ. आरकेएस धाकड़, डीन, जीआरएमसी