
नापतौल विभाग में एक ही कुर्सी पर बैठे अधिकारी दोहरी भूमिका अदा कर रहे हैं। इसके साथ ही कई ऐसे अफसर हैं जो कई वर्षों से एक ही जगह पर काबिज हैं।
ग्वालियर. मध्य प्रदेश के नापतौल विभाग में नियमों को ताक पर रखकर 'अजीबोगरीब खेल' चल रहा है, जिसे देखकर कोई भी हैरान रह जाए। यहां एक ही कुर्सी पर बैठे अधिकारी दोहरी भूमिका निभा रहे हैं-यानी जिम्मेदारी बड़े ओहदे की और 'मलाईदार' कमाई निरीक्षक (इंस्पेक्टर) के पद की। हैरानी की बात तो यह है कि विभाग के कई अधिकारी अपने मूल कार्यक्षेत्र से सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठकर निरीक्षक का चार्ज संभाले हुए हैं। वहीं नापतौल विभाग में कुछ अफसरों ने कुर्सी पर ऐसे अंगद की तरह पैर जमा रखे हैं कि साल गुजर गए, लेकिन तबादले की हवा भी उन्हें हिला नहीं पाई।
क्या है नियम और क्या हो रहा है?
विभाग में 13 संभागीय कार्यालय हैं। यहां 9 सहायक नियंत्रक और 4 उप नियंत्रक, यानी क्लास-2 अफसर तैनात होते हैं। हर संभाग के नीचे 4-5 जिले आते हैं। इनका काम है - इंस्पेक्टरों के काम पर नजर रखना। वहीं इंस्पेक्टर क्लास-3 का अमला है। यही सीधे मैदान में रहता है। व्यापारी, राशन दुकान, पेट्रोल पंप, फैक्ट्री - सबसे सीधा संपर्क इसी का। इसलिए इस पोस्ट पर 'ऊपरी कमाई' के रास्ते भी सबसे चौड़े माने जाते हैं। सहायक और उप नियंत्रक का काम कागजी, प्रशासनिक। नियम साफ कहता है- इंस्पेक्टर जब प्रमोट होकर सहायक नियंत्रक बनेगा, तो उसे इंस्पेक्टर का चार्ज छोडऩा होगा। पर यहां गंगा उल्टी बह रही है। प्रमोशन के बाद भी साहब इंस्पेक्टर की कुर्सी छोडऩे को तैयार नहीं। वजह सब समझते हैं।
एक अनार, सौ बीमार नहीं, एक अफसर कई-कई चार्ज
हालत देखिए, कई अफसर तो अपने मूल संभाग से सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठकर दूसरे जिले की नापजोख कर रहे हैं।
अंगद की तरह जमे हैं, हिलने का नाम नहीं
दूसरा बड़ा खेल ट्रांसफर नीति का है। 3 साल में तबादला होना चाहिए, पर यहां कई लोग दशक से ज्यादा समय से एक ही जगह जमे हैं।
कई बार वरिष्ठों को ध्यान दिलाया है
विभाग में इंस्पेक्टरों के काफी पद रिक्त हैं और पदोन्नति भी 10 साल से रुकी थी, इस कारण यह स्थिति बनी है। इंस्पेक्टर सहायक ग्रेड-3 की कमी से काम प्रभावित हो रहा है। कई बार वरिष्ठों का ध्यान दिलाया है। रिक्त पद भरने पर ही समाधान होगा।
जल्द ही इसमें बदलाव किए जाएंगे
प्रदेश में कई जगहों पर प्रभार के तौर पर काम चल रहा है। इससे गुणवत्तापूर्ण काम नहीं हो पाता। जल्द ही इसमें बदलाव किए जाएंगे। साथ ही जो कई वर्षों से एक ही जगह जमे हैं, उनके ट्रांसफर भी होंगे।
Updated on:
23 Aug 2026 11:25 am
Published on:
23 Aug 2026 11:25 am
