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नापतौल विभाग का गजब खेल : कुर्सी एक, मलाई दो! साहब उप-नियंत्रक भी, निरीक्षक भी, 350 किमी दूर बैठकर कैसे होगी निगरानी?

मध्य प्रदेश के नापतौल विभाग में नियमों को ताक पर रखकर 'अजीबोगरीब खेल' चल रहा है, जिसे देखकर कोई भी हैरान रह जाए। यहां एक ही कुर्सी पर बैठे अधिकारी दोहरी भूमिका निभा रहे हैं-यानी जिम्मेदारी बड़े ओहदे की और 'मलाईदार' कमाई निरीक्षक (इंस्पेक्टर) के पद की। हैरानी की बात तो यह है कि विभाग के कई अधिकारी अपने मूल कार्यक्षेत्र से सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठकर निरीक्षक का चार्ज संभाले हुए हैं।
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मध्य प्रदेश के नापतौल विभाग में नियमों को ताक पर रखकर 'अजीबोगरीब खेल' चल रहा है, जिसे देखकर कोई भी हैरान रह जाए। यहां एक ही कुर्सी पर बैठे अधिकारी दोहरी भूमिका निभा रहे हैं-यानी जिम्मेदारी बड़े ओहदे की और 'मलाईदार' कमाई निरीक्षक (इंस्पेक्टर) के पद की। हैरानी की बात तो यह है कि विभाग के कई अधिकारी अपने मूल कार्यक्षेत्र से सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठकर निरीक्षक का चार्ज संभाले हुए हैं।

नापतौल विभाग में एक ही कुर्सी पर बैठे अधिकारी दोहरी भूमिका अदा कर रहे हैं। इसके साथ ही कई ऐसे अफसर हैं जो कई वर्षों से एक ही जगह पर काबिज हैं।

  • प्रदेश में एक ही कुर्सी पर बैठकर निभाई जा रही दो-दो भूमिकाएं, प्रदेश भर में 13 संभाग कार्यालय हैं मौजूद, इधर अंगद के पैर की तरह जमे पड़े हैं कई लोग

ग्वालियर. मध्य प्रदेश के नापतौल विभाग में नियमों को ताक पर रखकर 'अजीबोगरीब खेल' चल रहा है, जिसे देखकर कोई भी हैरान रह जाए। यहां एक ही कुर्सी पर बैठे अधिकारी दोहरी भूमिका निभा रहे हैं-यानी जिम्मेदारी बड़े ओहदे की और 'मलाईदार' कमाई निरीक्षक (इंस्पेक्टर) के पद की। हैरानी की बात तो यह है कि विभाग के कई अधिकारी अपने मूल कार्यक्षेत्र से सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठकर निरीक्षक का चार्ज संभाले हुए हैं। वहीं नापतौल विभाग में कुछ अफसरों ने कुर्सी पर ऐसे अंगद की तरह पैर जमा रखे हैं कि साल गुजर गए, लेकिन तबादले की हवा भी उन्हें हिला नहीं पाई।

क्या है नियम और क्या हो रहा है?
विभाग में 13 संभागीय कार्यालय हैं। यहां 9 सहायक नियंत्रक और 4 उप नियंत्रक, यानी क्लास-2 अफसर तैनात होते हैं। हर संभाग के नीचे 4-5 जिले आते हैं। इनका काम है - इंस्पेक्टरों के काम पर नजर रखना। वहीं इंस्पेक्टर क्लास-3 का अमला है। यही सीधे मैदान में रहता है। व्यापारी, राशन दुकान, पेट्रोल पंप, फैक्ट्री - सबसे सीधा संपर्क इसी का। इसलिए इस पोस्ट पर 'ऊपरी कमाई' के रास्ते भी सबसे चौड़े माने जाते हैं। सहायक और उप नियंत्रक का काम कागजी, प्रशासनिक। नियम साफ कहता है- इंस्पेक्टर जब प्रमोट होकर सहायक नियंत्रक बनेगा, तो उसे इंस्पेक्टर का चार्ज छोडऩा होगा। पर यहां गंगा उल्टी बह रही है। प्रमोशन के बाद भी साहब इंस्पेक्टर की कुर्सी छोडऩे को तैयार नहीं। वजह सब समझते हैं।

एक अनार, सौ बीमार नहीं, एक अफसर कई-कई चार्ज
हालत देखिए, कई अफसर तो अपने मूल संभाग से सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठकर दूसरे जिले की नापजोख कर रहे हैं।

  • खेमराज चौधरी : इंदौर में इंस्पेक्टर हैं और सागर में सहायक नियंत्रक। दोनों जगहों में 350 किलोमीटर का फासला। सवाल सीधा है - साहब एक साथ दोनों जगह कैसे नापेंगे?
  • संजय पाटनकर : उप नियंत्रक इंदौर, सहायक नियंत्रक उज्जैन और उज्जैन के इंस्पेक्टर भी खुद ही। यानी खुद की निगरानी खुद ही कर रहे हैं। इससे बड़ा मजाक क्या होगा?
  • राजेश पिल्लई : ग्वालियर के उप नियंत्रक, भोपाल के उप नियंत्रक और भोपाल मुख्यालय के आहरण वितरण अधिकारी भी।
  • विजय खातरकर : रीवा के उप नियंत्रक, जबलपुर के उप नियंत्रक और रीवा के इंस्पेक्टर भी।बाकी फेहरिस्त भी ऐसी ही है - सलिल युक नर्मदापुरम में इंस्पेक्टर और सहायक नियंत्रक दोनों, एलसी खंडवी मुरैना में दोनों पदों पर, आरके कछवा शहडोल के सहायक नियंत्रक और बालाघाट के इंस्पेक्टर, भारत भूषण वर्मा रतलाम में सहायक नियंत्रक भी और इंस्पेक्टर भी। सजा वाले कुछ मामलों को छोड़ दें तो लगभग हर सहायक और उप नियंत्रक के पास इंस्पेक्टर का चार्ज है।

अंगद की तरह जमे हैं, हिलने का नाम नहीं
दूसरा बड़ा खेल ट्रांसफर नीति का है। 3 साल में तबादला होना चाहिए, पर यहां कई लोग दशक से ज्यादा समय से एक ही जगह जमे हैं।

  • आरपी गजभिए, सहायक नियंत्रक एवं इंस्पेक्टर, खंडवा - लगभग 10 साल से
  • आनंद मोहन, इंस्पेक्टर, धार - लगभग 13 साल से
  • वीएस सिंघानिया, इंस्पेक्टर, ग्वालियर - लगभग 8 साल से
  • शैलेन्द्र सिंह, इंस्पेक्टर, छिंदवाड़ा - 14 साल से, बीच में सिर्फ 1 साल सिवनी
  • दीपक गौड़, इंस्पेक्टर, सतना - 10 साल से सतना में, लेकिन रीवा संभाग में ही 13 साल से
  • सुनील निगम, इंस्पेक्टर, शहडोल - 12 साल से

कई बार वरिष्ठों को ध्यान दिलाया है
विभाग में इंस्पेक्टरों के काफी पद रिक्त हैं और पदोन्नति भी 10 साल से रुकी थी, इस कारण यह स्थिति बनी है। इंस्पेक्टर सहायक ग्रेड-3 की कमी से काम प्रभावित हो रहा है। कई बार वरिष्ठों का ध्यान दिलाया है। रिक्त पद भरने पर ही समाधान होगा।

  • उमाशंकर तिवारी, प्रदेश अध्यक्ष, मप्र नापतौल अधिकारी कर्मचारी संघर्ष समिति

जल्द ही इसमें बदलाव किए जाएंगे
प्रदेश में कई जगहों पर प्रभार के तौर पर काम चल रहा है। इससे गुणवत्तापूर्ण काम नहीं हो पाता। जल्द ही इसमें बदलाव किए जाएंगे। साथ ही जो कई वर्षों से एक ही जगह जमे हैं, उनके ट्रांसफर भी होंगे।

  • ब्रजेश सक्सेना, नियंत्रक, नापतौल विभाग मप्र