
Became company CEO using a fake salary slip
ग्वालियर. फर्जी दस्तावेजों और कूटरचित बैंक स्टेटमेंट के सहारे एक नामी ऑटोमोबाइल कंपनी में सीधे ग्रुप वाइस प्रेसिडेंट का पद हथियाकर 11 महीने तक लाखों रुपये की पगार डकारने वाले शातिर का भंडाफोड़ हुआ है। कंपनी को लंबे समय तक अंधेरे में रखने के बाद जब आरोपी ने अचानक इस्तीफा दिया, तो फुल एंड फाइनल हिसाब-किताब के दौरान उसकी पोल खुल गई। क्राइम ब्रांच पुलिस ने कंपनी की शिकायत पर मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। तुलजा भवानी ऑटोमोबाइल प्राइवेट लिमिटेड के एचआर अवधेश गोस्वामी ने पुलिस को बताया कि कानपुर निवासी देवेंद्र (43) पुत्र रामनरेश दुबे ने पिछले साल 20 अगस्त को उनकी कंपनी में ग्रुप वाइस प्रेसिडेंट के पद पर ज्वॉइनिंग ली थी। देवेंद्र ने दावा किया था कि वह एक बड़े कॉर्पोरेट ग्रुप में ऊंचे पद पर था और उसकी पुरानी पगार 2 लाख 80 हजार 670 रुपये प्रति माह थी। उसने भारी-भरकम पैकेज पर नौकरी हासिल की और बाद में कंपनी ने उसे ग्रुप सीईओ का प्रभार भी सौंप दिया।
मई में त्यागपत्र देने के बाद हुई दस्तावेजों की पड़ताल, फर्जीवाड़ा उजागर होते ही जांच में जुटी क्राइम ब्रांच
मई में देवेंद्र के त्यागपत्र देने के बाद जब नियमानुसार उसके बैंक खातों और सैलरी स्लिप की पड़ताल की गई, तो कंपनी के होश उड़ गए। देवेंद्र का बैंक स्टेटमेंट पूरी तरह फर्जी निकला, जिस पर बैंक मैनेजर के बजाय देवेंद्र के अपने दस्तखत थे। उसने कभी किसी बड़े ग्रुप में काम ही नहीं किया था। क्राइम ब्रांच टीआई अमित शर्मा ने बताया कि धोखाधड़ी और कूटरचना की धाराओं में केस दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
Updated on:
21 Aug 2026 05:53 pm
Published on:
21 Aug 2026 05:53 pm
