शहरवासियों के लिए इस समय स्थितियां एक तो करेला, ऊपर से नीम चढ़ा जैसी हो गई हैं। एक तरफ आसमान से बरसती आग और भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है, तो दूसरी तरफ शहर की आबो-हवा
खुले में जलता कचरा भी बढ़ा रहा आफत, डीडी नगर बना हॉटस्पॉट, 172 पहुंचा एक्यूआइ
ग्वालियर. शहरवासियों के लिए इस समय स्थितियां एक तो करेला, ऊपर से नीम चढ़ा जैसी हो गई हैं। एक तरफ आसमान से बरसती आग और भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है, तो दूसरी तरफ शहर की आबो-हवा इतनी जहरीली हो चुकी है कि सांस लेना भी दूभर हो गया है। प्रदूषण के मामले में ग्वालियर ने एक बार फिर पूरे मध्य प्रदेश को पीछे छोड़ दिया है और सूबे के सबसे प्रदूषित शहर के रूप में टॉप' पर पहुंच गया है। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के समीर ऐप के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, ग्वालियर का ओवरऑल एयर क्वालिटी इंडेक्स 138 दर्ज किया गया है, जो प्रदेश के सभी बड़े महानगरों में सबसे अधिक और चिंताजनक है।
शहर के अलग-अलग मॉनिटरिंग सेंटरों के आंकड़े फेफड़ों पर सीधे अटैक की गवाही दे रहे हैं। डीडी नगर में एक्यूआई 172, महाराज बाड़ा में 165 और सिटी सेंटर में 150 दर्ज किया गया है, जो खराब श्रेणी में आता है। विडंबना देखिए कि शहर के बीचों-बीच स्थित फूलबाग एयर मॉनिटरिंग सेंटर पिछले एक साल से तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़ा है। ऐसे में शहर के सबसे व्यस्त और संवेदनशील इलाके की वास्तविक स्थिति का डेटा ही सामने नहीं आ पा रहा है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, जहाँ मिनी मुंबई कहा जाने वाला इंदौर (79) सबसे साफ हवा के साथ मिसाल बना हुआ है, वहीं ग्वालियर गंदगी और प्रदूषण का केंद्र बनता जा रहा है: