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नीम, शीशम, खैर और पीपल से सजेगा जंगल, बेहट, घाटीगांव और मोहना क्षेत्र में खोदे गड्ढे

ग्वालियर वन मंडल को हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए वन विभाग इस बार पौधारोपण का एक नया रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में जुट गया है। बीते वर्ष 2025 में जहां विभाग के पास 4 लाख 95 हजार पौधे

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gwalior news

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ग्वालियर. ग्वालियर वन मंडल को हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए वन विभाग इस बार पौधारोपण का एक नया रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में जुट गया है। बीते वर्ष 2025 में जहां विभाग के पास 4 लाख 95 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य था, वहीं इस साल इसे बढ़ाकर 6 लाख 80 हजार कर दिया गया है। इस महाअभियान को सफल बनाने के लिए बेहट, घाटीगांव और मोहना के जंगलों में बड़े स्तर पर गड्ढे खोदने का काम एडवांस में पूरा कर लिया गया है।

बढ़ेगा सर्वाइवल रेट…

इस बार वन विभाग एक नई और अनूठी वैज्ञानिक रणनीति पर काम कर रहा है। मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने से पहले ही, यानी प्री-मानसून के दौरान लगभग 15 हजार पौधे डेमो (ट्रायल) के तौर पर एडवांस में रोपे जाएंगे। इसका उद्देश्य यह परखना है कि शुरुआती सूखे-गर्म मौसम में इन पौधों की जीवित रहने की दर (सर्वाइवल रेट) और अनुकूलता कैसी रहती है। इसके नतीजों के आधार पर मुख्य मानसून के दौरान रोपण की रणनीति को और मजबूत किया जाएगा।

तैयार हो रही हरियाली की चादर

वन विभाग ने इस पौधारोपण के लिए ग्वालियर और उसके आस-पास के प्रमुख वन क्षेत्रों को चिह्नित किया है। इस महाअभियान के तहत बेहट वन क्षेत्र, घाटीगांव अभ्यारण्य क्षेत्र, मोहना और ग्वालियर शहर की बाहरी सीमा के पहाड़ी क्षेत्रों को चुना गया है। अच्छी बात यह है कि पिछले साल लगाए गए पौधे अब तेजी से आकार ले रहे हैं, जिससे इस साल का लक्ष्य पूरा होने पर अंचल का ग्रीन कवर काफी मजबूत हो जाएगा।

ग्वालियर की आबोहवा के अनुकूल पौधों पर फोकस

इस बार पौधारोपण में ऐसे पेड़ों को प्राथमिकता दी जा रही है जो कम पानी में जीवित रह सकें और पर्यावरण को अधिकतम ऑक्सीजन दे सकें:

  • नीम व पीपल: शुद्ध हवा और 24 घंटे निरंतर ऑक्सीजन देने के लिए।
  • शीशम व महुआ: मजबूत लकड़ी और स्थानीय वन्यजीवों के अनुकूलन के लिए।
  • खैर व जंगल जलेबी: कटीले, बेहद मजबूत और कम पानी वाले शुष्क क्षेत्रों के लिए अनुकूल।
  • चिरोल, करंज व जामुन: तेजी से बढऩे वाले, छायादार और फलदार वृक्ष।

इनका कहना है

इस बार अंचल में पौधारोपण का लक्ष्य बढ़ाकर 6 लाख 80 हजार किया गया है, जिसकी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। मानसून से पहले 15 हजार पौधे लगाकर हम नया प्रयोग कर रहे हैं, ताकि पौधों की सुरक्षा और सर्वाइवल रेट को और बेहतर किया जा सके।
मुकेश पटेल, डीएफओ, ग्वालियर