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जर्जर सड़कें, उड़ती धूल, निर्माण कार्यों से प्रदूषण में टॉप पर पहुंचा ग्वालियर

शहरवासियों के लिए इस समय स्थितियां एक तो करेला, ऊपर से नीम चढ़ा जैसी हो गई हैं। एक तरफ आसमान से बरसती आग और भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है, तो दूसरी तरफ शहर की आबो-हवा
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ग्वालियर

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Rizwan Khan

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Updated: 27 May 2026, 6:02 PM IST

Gwalior pollution levels

Gwalior pollution levels

खुले में जलता कचरा भी बढ़ा रहा आफत, डीडी नगर बना हॉटस्पॉट, 172 पहुंचा एक्यूआइ

ग्वालियर. शहरवासियों के लिए इस समय स्थितियां एक तो करेला, ऊपर से नीम चढ़ा जैसी हो गई हैं। एक तरफ आसमान से बरसती आग और भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है, तो दूसरी तरफ शहर की आबो-हवा इतनी जहरीली हो चुकी है कि सांस लेना भी दूभर हो गया है। प्रदूषण के मामले में ग्वालियर ने एक बार फिर पूरे मध्य प्रदेश को पीछे छोड़ दिया है और सूबे के सबसे प्रदूषित शहर के रूप में टॉप' पर पहुंच गया है। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के समीर ऐप के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, ग्वालियर का ओवरऑल एयर क्वालिटी इंडेक्स 138 दर्ज किया गया है, जो प्रदेश के सभी बड़े महानगरों में सबसे अधिक और चिंताजनक है।

शहर के अलग-अलग मॉनिटरिंग सेंटरों के आंकड़े फेफड़ों पर सीधे अटैक की गवाही दे रहे हैं। डीडी नगर में एक्यूआई 172, महाराज बाड़ा में 165 और सिटी सेंटर में 150 दर्ज किया गया है, जो खराब श्रेणी में आता है। विडंबना देखिए कि शहर के बीचों-बीच स्थित फूलबाग एयर मॉनिटरिंग सेंटर पिछले एक साल से तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़ा है। ऐसे में शहर के सबसे व्यस्त और संवेदनशील इलाके की वास्तविक स्थिति का डेटा ही सामने नहीं आ पा रहा है।

एमपी के शहरों का प्रदूषण रिपोर्ट कार्ड

ताजा आंकड़ों के अनुसार, जहाँ मिनी मुंबई कहा जाने वाला इंदौर (79) सबसे साफ हवा के साथ मिसाल बना हुआ है, वहीं ग्वालियर गंदगी और प्रदूषण का केंद्र बनता जा रहा है:

  • ग्वालियर: 138
  • सागर: 124
  • जबलपुर: 120
  • भोपाल: 119
  • रतलाम: 96
  • इंदौर: 79

शहर को गैस चैंबर बनाने वाले मुख्य कारण

  1. धूल का गुबार और जर्जर सड़कें: शहर की उखड़ी हुई सड़कें प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह हैं। वाहनों के गुजरते ही धूल के महीन कण (PM 2.5 और PM 10) हवा में घुल जाते हैं, जो फेफड़ों में गहरे उतर रहे हैं।
  2. निर्माण कार्यों में लापरवाही: बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स और निजी कंस्ट्रक्शन साइट्स पर एनजीटी के नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। न तो निर्माण सामग्री को ढका जा रहा है और न ही पानी का छिड़काव किया जा रहा है।
  3. खुले में कचरा जलाना: नगर निगम के दावों के विपरीत, खाली प्लॉटों और सड़कों के किनारे खुलेआम कचरे के ढेरों में आग लगाई जा रही है, जिसका जहरीला धुआं शहर के वायुमंडल को प्रदूषित कर रहा है।