
ग्वालियर. मध्यप्रदेश में साइबर ठगी का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले इतने बढ़ गए हैं कि वर्ष 2026 के शुरुआती आठ महीनों में ही प्रदेश में पूरे 2025 की करीब 95.5 प्रतिशत शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। जनवरी से 31 अगस्त तक साइबर फ्रॉड की 53,530 शिकायतें सामने आईं, जिनमें 308.35 करोड़ रुपए की ठगी हुई। राहत की बात यह है कि समय रहते कार्रवाई से 86.16 करोड़ रुपए बचाए गए, लेकिन ठगी के बाद पीडि़तों की रकम लौटाने और शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। मध्यप्रदेश राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की 199वीं बैठक के एजेंडे में सामने आए आंकड़े बैंकिंग व्यवस्था के सामने खड़ी इस चुनौती की गंभीरता बताते हैं।
आठ महीने में हर दिन 220 से ज्यादा शिकायतें
2026 के जनवरी से अगस्त तक के आंकड़ों को देखें तो प्रदेश में औसतन करीब 220 साइबर फ्रॉड शिकायतें रोज दर्ज हुईं। वहीं 2025 में पूरे साल औसतन करीब 154 शिकायतें प्रतिदिन दर्ज हुई थीं। यानी शिकायतों की रफ्तार में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।
साल साइबर फ्रॉड शिकायतें ठगी की रकम बचाई गई रकम
2024 48,605 465 करोड़ रुपए 51.59 करोड़ रुपए
2025 56,051 634 करोड़ रुपए 137 करोड़ रुपए
2026 (31 अगस्त तक) 53,530 308.35 करोड़ रुपए 86.16 करोड़ रुपए
6,600 मामलों में अटकी रकम वापसी
साइबर ठगी के पीडि़तों को रकम वापस दिलाने की प्रक्रिया में भी बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। 31 अगस्त तक मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल में 12,986 मामले रकम बहाली के लिए तैयार थे। पीडि़तों की ओर से 9,509 अनुरोध किए गए, जिनमें 2,340 मामलों में कार्रवाई पूरी हुई और करीब 1.19 करोड़ रुपए वापस बहाल किए गए। दूसरी ओर, 3,531 मामले कानून प्रवर्तन एजेंसियों (एलइए) और 3,069 मामले बैंक स्तर पर लंबित थे। इन 6,600 मामलों में क्रमश: 256.47 लाख और 260.18 लाख रुपए जुड़े हैं। यानी ठगी की रकम रोकने के बाद उसे पीडि़त तक पहुंचाने की प्रक्रिया में भी तेजी लाने की जरूरत है।
1,551 शिकायतों का निपटारा बाकी
शिकायत निवारण मॉड्यूल में 31 अगस्त तक 1,611 शिकायतें दर्ज थीं। इनमें एलइए ने 780 मामलों में कार्रवाई की, जबकि 60 मामलों में कार्रवाई पूरी हुई। इनमें 60 बैंक खातों को अनहोल्ड या अनफ्रीज करना भी शामिल है। इसके बावजूद 831 मामले एलईए और 720 मामले बैंक स्तर पर लंबित थे। कुल 1,551 मामलों की पेंडेंसी बताती है कि शिकायत दर्ज होने से लेकर अंतिम समाधान तक की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है।
रात और छुट्टियों में भी जरूरी है त्वरित कार्रवाई
एसएलबीसी के दस्तावेज में इस बात पर जोर दिया गया है कि रात या छुट्टियों के दौरान साइबर ठगी की सूचना मिलने पर संदिग्ध खाते की जानकारी जुटाने और उसमें रकम रोकने के लिए होल्ड, फ्रीज या लीन लगाने की कार्रवाई में देरी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए बैंकिंग व्यवस्था को 24 घंटे, सातों दिन सक्रिय रखने की जरूरत रेखांकित की गई है। क्योंकि ठगी के बाद शुरुआती मिनटों में रकम रोकना ही पीडि़त के पैसे बचाने में निर्णायक साबित हो सकता है।
साइबर ठगी से सतर्क रहें
साइबर ठगी से बचने के लिए लोगों को सतर्क रहना चाहिए। किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी या अन्य गोपनीय विवरण किसी से साझा न करें। ठगी होने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर भी जानकारी दें। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, रकम को संदिग्ध खाते में रोकने की संभावना उतनी बेहतर रहेगी।