
ग्वालियर. मध्य प्रदेश और अंचल के रूटों पर दौडऩे वाली यात्री बसों का स्वरूप पिछले कुछ वर्षों में पूरी तरह बदल चुका है। आधुनिक इंजन, आरामदायक पुश-बैक सीटें, एसी, जीपीएस ट्रैङ्क्षकग और ऑनलाइन टिकङ्क्षटग जैसी हाईटेक सुविधाओं ने सफर को भले ही आरामदायक बना दिया हो, लेकिन इसके उलट यात्रियों की सुरक्षा के इंतजाम लगातार कमजोर होते जा रहे हैं।
हालत यह है कि यात्री बसें अब केवल मुसाफिरी का साधन नहीं रहीं, बल्कि पार्सल और माल ढोने वाले कमर्शियल वाहन में तब्दील हो चुकी हैं। ङ्क्षचता की सबसे बड़ी बात यह है कि बसों में यात्रियों के सामान के साथ ज्वलनशील और खतरनाक सामग्री भी बेधडक़ ढोई जा रही है, जो किसी भी वक्त एक भीषण अग्निकांड या बड़े हादसे का कारण बन सकती है। सवाल यह है कि जब बसें तकनीक और लग्जरी के मामले में हवाई जहाज जैसी सुविधाएं देने का दावा कर रही हैं, तो सुरक्षा के मोर्चे पर इतनी बड़ी लापरवाही क्यों बरती जा रही है?
यात्री बसों का प्राथमिक उद्देश्य लोगों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाना है। लेकिन मुनाफे की अंधी दौड़ में बस संचालकों ने सुरक्षा के सभी कायदे ताक पर रख दिए हैं। बसों की डिक्की से लेकर यात्रियों के बैठने की जगह, गलियारों और केबिन तक में भारी-भरकम कमर्शियल पार्सल और बोरियां लाद दी जाती हैं। सबसे खतरनाक पहलू यह है कि इस माल के साथ कई बार केमिकल्स, गैस सिलेंडर या अन्य ज्वलनशील सामग्रियां भी रख दी जाती हैं। यदि सफर के दौरान शॉर्ट सर्किट या किसी अन्य वजह से ङ्क्षचगारी भडक़ उठी, तो चलती बस में सवार दर्जनों यात्रियों का बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाएगा। इसके बावजूद परिवहन विभाग और आरटीओ की आंखें बंद हैं।
यात्री बसों में यात्रियों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। बसों में क्षमता से अधिक सामान लादने और ज्वलनशील या प्रतिबंधित सामग्री के परिवहन की औचक जांच की जाएगी। नियमों का उल्लंघन मिलने पर बस संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
— विक्रमजीत ङ्क्षसह कंग, आरटीओ, ग्वालियर
Updated on:
15 Oct 2026 06:08 pm
Published on:
15 Oct 2026 06:07 pm
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