ग्वालियर

चीनी से तौबा, रसोई में लौट आया दादा-दादी के जमाने का देसी खांड

रसोई के डिब्बे में बंद चीनी से अब लोगों का मोहभंग होने लगा है, जो सालों से स्वाद के बहाने हमारी रगों में बीमारियां घोल रहा था। जी हां, हम बात कर रहे हैं रिफाइंड सफेद शक्कर की। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो चुके शहरवासियों ने अब इस चमकीली शक्कर को बाय-बाय कहना शुरू कर दिया है।
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Jul 11, 2026
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Khand

ग्वालियर. रसोई के डिब्बे में बंद चीनी से अब लोगों का मोहभंग होने लगा है, जो सालों से स्वाद के बहाने हमारी रगों में बीमारियां घोल रहा था। जी हां, हम बात कर रहे हैं रिफाइंड सफेद शक्कर की। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो चुके शहरवासियों ने अब इस चमकीली शक्कर को बाय-बाय कहना शुरू कर दिया है। यही वजह है कि आज आधुनिक किचन्स में दादा-दादी के जमाने का पारंपरिक देसी खांड पूरी शान से लौट आया है। त्योहारों के पकवानों से लेकर सुबह की चाय तक में इसका उपयोग बढ़ा है।

बजट पर भारी, फिर भी सेहत पर खरी
बाजार के जानकारों की मानें तो देसी खांड आम चीनी के मुकाबले दोगुनी कीमत (60 से 120 रुपए प्रति किलो) पर बिक रही है। इसके बावजूद सुपरमार्केट्स से लेकर गली-मोहल्ले की किराना दुकानों तक इसकी डिमांड में भारी उछाल आया है। सफेद चीनी को चमकाने और रिफाइन करने के खेल में सल्फर, ब्लीचिंग एजेंट और न जाने कितने खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल होता है, जो हमारे शरीर के लिए नुकसानदायक है। वहीं देसी खांड केमिकल-फ्री है। बिना किसी मिलावट और ब्लीचिंग के तैयार होने वाला यह खांड आज की पीढ़ी के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह उभर रहा है।

क्यों बेहतर है पुराना विकल्प?
चिकित्सकों और आहार विशेषज्ञों के अनुसार, सफेद शक्कर में प्रोसेसिंग के दौरान सारे पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं और वह सिर्फ एम्प्टी कैलोरी (शून्य पोषक तत्व) बनकर रह जाती है। वहीं, कम प्रोसेङ्क्षसग के कारण देसी खांड में प्रकृति के दिए अनमोल खजाने जैसे कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे खनिज पूरी तरह बरकरार रहते हैं। इसके अलावा, आयुर्वेद के अनुसार जहां सफेद शक्कर की तासीर गर्म और एसिडिक होती है, वहीं देसी खांड की तासीर ठंडी मानी जाती है, जो पेट और पाचन के लिए बेहद मुफीद है। सीसीआरएएस ग्वालियर के वरिष्ठ आयुर्वेद अनुसंधान अधिकारी डॉ.अनिल मंगल के मुताबिक सफेद शक्कर सल्फर से सफाई से होने से हानिकारक है।

यह बात बिल्कुल सच है कि पिछले कुछ समय में सेहत को लेकर बढ़े रिस्क के कारण देसी खांड की मांग में अप्रत्याशित तेजी आई है। बाजार में स्थानीय से लेकर बड़े ब्रांड्स तक का देसी खांड उपलब्ध है।
-मनीष बांदिल, सचिव, शक्कर-खांडसारी एसोसिएशन, ग्वालियर

मुझे डायबिटीज, बढ़ा हुआ यूरिक एसिड और हाई कोलेस्ट्रॉल की गंभीर समस्या थी। डॉक्टर ने मुझे सफेद शक्कर पूरी तरह छोड़ने और उसकी जगह देसी खांड अपनाने की सलाह दी।
-लक्ष्मीनारायण अग्रवाल, जागरूक उपभोक्ता

Updated on:
11 Jul 2026 05:44 pm
Published on:
11 Jul 2026 05:42 pm