15 दिन पहले ही कूनो सेंक्चुरी से नर चीता पवन और मादा चीता वीरा सेंक्चुरी सीमा को लांघकर बाहर निकल आए थे। हालांकि नरचीता पवन तो वापस कूनो में लौट गया, लेकिन मादा चीता वीरा पहाड़गढ़-चांचुल के जंगलों में 350 किमी लंबा सफर तय कर पगारा क्षेत्र के जंगलों में आ गई।
मुरैना. श्योपुर की कूनो सेंक्चुरी से बाहर निकलकर मुरैना के जौरा (पगारा) क्षेत्र में घूम रही मादा चीता वीरा ने बकरे-बकरियों के बाद रविवार सुबह एक नीलगाय का शिकार किया। रात के वक्त खेत पर मौजूद ग्रामीणों ने जब चीता को देखा तो वह भागकर अपने घरों की ओर लौट आए।
15 दिन पहले ही कूनो सेंक्चुरी से नर चीता पवन और मादा चीता वीरा सेंक्चुरी सीमा को लांघकर बाहर निकल आए थे। हालांकि नरचीता पवन तो वापस कूनो में लौट गया, लेकिन मादा चीता वीरा पहाड़गढ़-चांचुल के जंगलों में 350 किमी लंबा सफर तय कर पगारा क्षेत्र के जंगलों में आ गई। 3 दिन पहले वीरा ने नरहेला गांव के पास एक बकरे और एक बकरी का शिकार किया। शनिवार रात 12 बजे नरहेला गांव में रहने वाले किसान रामअवतार जादौन पांच-छह अन्य लोगों के साथ खेतों की रखवाली कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने खेत की मेढ़ पर मादा चीता वीरा को देखा, जिसके बाद ग्रामीण वहां से भाग आए। सुबह जब कुछ ग्रामीण खेत के पास पहुंचे तो उन्होंने देखा कि चीता एक नीलगाय के शव के पास बैठकर मांस खा रहा है।
चीता ने नीलगाय पर हमला कर उसे मार डाला
हम पांच-छह लोग शनिवार की रात अपने खेतों की निगरानी कर रहे थे। रात 12 बजे के करीब जानवर (चीता) हमारे खेत की मेढ़ के नजदीक दिखाई दी। जिसके चलते हम लोग भाग गए। सुबह खेत के पास ही नीलगाय के शव के पास मादा चीता भी नजर आई।
रामअवतार जादौन, किसान नरहेला
जौरा क्षेत्र में मादा चीता वीरा द्वारा एक और हमले की जानकारी आई है। कूनों की टीमों के साथ हमारा अमला क्षेत्र में निगरानी कर रहा है।
स्वरूप दीक्षित, डीएफओ मुरैना