दसवीं की छात्रा दीक्षा यादव को आसमानी गोली नहीं लगी थी,उसने 315 बोर के कट्टे से सीने में गोली मारी थी।
ग्वालियर। दसवीं की छात्रा दीक्षा यादव को आसमानी गोली नहीं लगी थी,उसने ३१५ बोर के कट्टे से सीने में गोली मारी थी। मंगलवार देर रात दीक्षा के घर की सर्चिंग में पुलिस को वह कट्टा भी बरामदे में ही पड़ा मिल गया। इसके अलावा घर और आसपास के लोगों और बच्चों ने पुलिस को बताया उन्होंने मंगलवार को धमाके की आवाज सुनी उसके बाद दीक्षा को परिजन जख्मी हालत में लेकर भागे थे। इससे जाहिर है कि दीक्षा को आसमानी गोली लगने की कहानी गलत है। परिजन ने सुसाइड को छिपाने की कोशिश क्यों की,किस बात से दीक्षा ने परेशान होकर खुद को गोली मारी,सुसाइड के लिए उसे कट्टा कैसे मिला। पुलिस पता लगाने में जुटी है।
बुधवार को इन सवालों का जवाब तलाशने के लिए पुलिस फिर सत्यानारायण मोहल्ले में वीरेन्द्र यादव के घर पहुंची थी। लेकिन बेटी की मौत से दुखी परिजनों ने कहा अभी वह कुछ भी बताने की हालत में नहीं है, तो लौट आई। दीक्षा पुत्री वीरेन्द्र यादव को मंगलवार दोपहर बाद सीने में गोली लगी थी।
तब परिजनों ने कहा था दीक्षा बरामदे में थी आशंका है उसे किसी हर्ष फायर में चली गोली धंसी है। पुलिस का कहना है दीक्षा को गोली बरामदे में नहीं बल्कि उसके पास बने कमरे में लगी है। अब परिजन भी बता रहे हैं दीक्षा कमरे के गेट के पास जख्मी हालत में पड़ी मिली थी।
घटनास्थल सील
दीक्षा ने जिस कट्टे से गोली मारकर सुसाइड किया है उस पर कलावा बंधा है। जाहिर है कट्टा जिसके पास था उसने अवैध हथियार का पूजन भी किया है। ग्वालियर टीआई एमएम मालवीय ने बताया दीक्षा के गोली लगने की घटना सामने आने के बाद उस स्पॉट को सील कर दिया था। रात को जब घटनास्थल का निरीक्षण किया तो घर के सदस्यों ने ही बताया कि सुसाइड में इस्तेमाल कट्टा भी वहीं पड़ा है।